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June 28, 2026
गजब...घाटे में चल रहा HRTC कर्ज लेकर चुकाएगा कर्मियों-पेंशनरों की लंबित देनदारियां; दूसरी बार लेगा लोन
कर्मचारियों पेंशनरों की लंबित देनदारियां चुकाने के लिए एचआरटीसी प्रबंधन लेगा दूसरी बार कर्ज
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शिमला। हिमाचल प्रदेश का गौरव और सार्वजनिक क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा उपक्रम, हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC), इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है। आलम यह है कि जो निगम प्रदेश के कोने-कोने तक जनता को पहुंचाता है, वह खुद आर्थिक रूप से पूरी तरह पटरी से उतर चुका है। अब निगम प्रबंधन ने अपने कर्मचारियों और पेंशनरों के करोड़ों रुपये के लंबित बकाये को चुकाने के लिए एक बार फिर से कर्ज का सहारा लेने का मन बनाया है।
यह इस साल का दूसरा ऐसा मौका है जब देश के सबसे अधिक घाटे में चल रहे परिवहन निगमों में से एक एचआरटीसी अपनी देनदारियां चुकाने के लिए कर्ज लेने जा रहा है। इससे पहले भी सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वित्तीय लाभों के निपटारे के लिए 150 करोड़ रुपये का ऋण लिया जा चुका है। चालक-परिचालक यूनियन के साथ हुई बैठक में प्रबंधन ने लंबित भत्ते देने का वादा तो कर दिया था, लेकिन तिजोरी खाली होने के कारण अब बैंक से लोन लेने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।
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एचआरटीसी कर्मचारियों को लंबे समय से कई वित्तीय लाभों का इंतजार है। इनमें रात्रि भत्ता, ओवरटाइम, महंगाई भत्ते की किस्तें और अन्य देय भुगतान शामिल हैं। वहीं, सेवानिवृत्त कर्मचारी भी अपने वित्तीय लाभों के लिए लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। निगम और कर्मचारी संगठनों के बीच हुई बैठकों में बकाया राशि देने पर सहमति तो बनी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण भुगतान नहीं हो सका। अब कर्ज के जरिए इन देनदारियों को चरणबद्ध तरीके से चुकाने की योजना बनाई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैंकों के साथ प्रारंभिक स्तर पर चर्चा शुरू कर दी है। जल्द ही ऋण लेने का प्रस्ताव एचआरटीसी के निदेशक मंडल की बैठक में रखा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद निगम औपचारिक रूप से ऋण के लिए आवेदन करेगा। प्रबंधन का मानना है कि इससे कर्मचारियों और पेंशनरों को राहत मिलेगी तथा लंबे समय से लंबित भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
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यह पहला अवसर नहीं है जब एचआरटीसी वित्तीय दायित्वों को पूरा करने के लिए ऋण लेने जा रहा है। इससे पहले भी निगम सेवानिवृत्त कर्मचारियों की देनदारियों के भुगतान के लिए करीब 150 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुका है। अब बढ़ते दबाव और लंबित भुगतान को देखते हुए एक बार फिर इसी विकल्प पर विचार किया जा रहा है।
एचआरटीसी की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। निगम का संचित घाटा बढ़कर लगभग 2200 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। पिछले कुछ वर्षों में घाटा लगातार बढ़ा है, जिससे निगम की वित्तीय सेहत पर गंभीर असर पड़ा है। स्थिति यह है कि कई बार कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के भुगतान के लिए भी सरकार से वित्तीय सहायता की आवश्यकता पड़ती है। बढ़ती लागत, परिचालन खर्च और सीमित आय के कारण निगम पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
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वर्तमान में एचआरटीसी में 10 हजार से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसे में लंबित देनदारियों का मुद्दा हजारों परिवारों से जुड़ा हुआ है। कर्मचारियों और पेंशनरों को उम्मीद है कि ऋण की व्यवस्था होने के बाद उनके बकाया भुगतान का रास्ता साफ होगा।
निगम प्रबंधन का कहना है कि कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों की सभी लंबित देनदारियों का निपटारा एक साथ संभव नहीं है। इसलिए भुगतान चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। इसके लिए वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था करने के सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
एचआरटीसी लंबे समय से वित्तीय संकट और बढ़ते घाटे की मार झेल रहा है। ऐसे में कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया भुगतान के लिए कर्ज लेने का फैसला राहत भरा कदम माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि निगम को दीर्घकालिक समाधान के लिए अपनी आय बढ़ाने और घाटे को नियंत्रित करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाने होंगे।