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April 20, 2026
हिमाचल के अधिकारियों को झटका : अब नहीं मिलेगी पूरी सैलरी, CM ने लिया बड़ा फैसला
नेताओं के बाद अभ अधिकारियों के वेतन पर रोक
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में वित्तीय दबाव को देखते हुए सरकार ने एक अहम प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य सरकार ने उच्च पदों पर कार्यरत अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के वेतन का एक हिस्सा अस्थायी रूप से रोकने (डेफर करने) के आदेश जारी किए हैं।
सरकार का कहना है कि यह कदम मौजूदा आर्थिक स्थिति को संभालने और वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए उठाया गया है। जारी अधिसूचना के अनुसार अफसरों की सैलरी का कुछ हिस्सा काटा जाएगा।
मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और डीजीपी स्तर के अधिकारियों के वेतन का 30 प्रतिशत हिस्सा अगले छह महीने तक स्थगित रहेगा। वहीं सचिव, विभागाध्यक्ष, आईजी, डीआईजी, एसपी और वन विभाग के अधिकारियों के वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा अस्थायी रूप से रोका जाएगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कोई स्थायी कटौती नहीं है, बल्कि केवल अस्थायी व्यवस्था है। अप्रैल 2026 के वेतन (जो मई में जारी होगा) से यह लागू होगा। रोकी गई राशि भविष्य में राज्य की वित्तीय स्थिति सुधरने पर जारी कर दी जाएगी और इसे पेंशन व लीव एनकैशमेंट जैसे लाभों में भी शामिल किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया का विवरण ई-सैलरी सिस्टम में दर्ज रहेगा।
सरकार ने बोर्ड, निगम, पीएसयू, विश्वविद्यालयों और अनुदान प्राप्त संस्थाओं को भी इस व्यवस्था को अपनाने के निर्देश दिए हैं। जिन अधिकारियों पर ऋण की emi चल रही है, उन्हें राहत देते हुए विकल्प दिया गया है कि वे आवेदन कर emi कटने के बाद बची राशि पर ही यह स्थगन लागू करवा सकते हैं।
इस फैसले का असर जनप्रतिनिधियों पर भी पड़ेगा। अधिसूचना के अनुसार अगले छह महीनों के लिए मुख्यमंत्री के वेतन का 50 प्रतिशत हिस्सा स्थगित रहेगा। वहीं उपमुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद के सदस्य, विधानसभा अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के वेतन का 30 प्रतिशत और विधायकों के वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा अस्थायी रूप से रोका जाएगा।
सरकार ने दोहराया है कि इसे वेतन कटौती के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह केवल एक अस्थायी वित्तीय प्रबंधन उपाय है और स्थिति सुधरने पर संबंधित राशि जारी कर दी जाएगी।
इस फैसले की पृष्ठभूमि राज्य के बजट से जुड़ी है। CM सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 21 मार्च को बजट पेश करते हुए आर्थिक चुनौतियों का जिक्र किया था। वेतन का हिस्सा 3 से 50 प्रतिशत तक छह महीने के लिए स्थगित करने की घोषणा की थी।
हालांकि, बाद में सरकार ने प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के 3 प्रतिशत वेतन स्थगन के फैसले को 15 अप्रैल को वापस ले लिया था। यह घोषणा रिकांगपिओ में आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान की गई थी।
सरकार का कहना है कि मौजूदा कदम सामूहिक जिम्मेदारी के तहत उठाया गया है- ताकि सीमित संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सके। साथ ही राज्य की वित्तीय स्थिति को संतुलित रखा जा सके।