#विविध
December 23, 2025
पंचायत चुनाव पर घमासान: आचार संहिता के बीच सुक्खू सरकार ने जारी कर दी पुनर्गठन की अधिसूचना
राज्य चुनाव आयोग ने आचार संहिता लागू कर पंचायतों के पुनर्गठन पर लगाई है रोक
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सुक्खू सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति बनती जा रही है। पंचायत चुनाव में देरी का मामला जहां एक तरफ हिमाचल हाईकोर्ट में विचाराधीन है, तो वहीं दूसरी तरफ राज्य निर्वाचन आयोग और प्रदेश की कांग्रेस सरकार अपने अपने स्तर पर कामकाजी गतिविधियों को आगे बढ़ा रही है। अब राज्य चुनाव आयोग द्वारा लगाई आचार संहिता के बीच ही सुक्खू सरकार ने नई पंचायतों के गठन और पुनर्गठन की अधिसूचना जारी कर दी है।
सुक्खू सरकार की इस अधिसूचना के बाद अब एक बार फिर हिमाचल मेंसियासी और संवैधानिक हलचल तेज हो गई है। एक ओर सुक्खू सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग आमने.सामने हैं, तो दूसरी ओर आचार संहिता के माहौल में सरकार ने पंचायतों के पुनर्गठन और नई पंचायतों के गठन की अधिसूचना जारी कर नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस फैसले ने चुनावी प्रक्रिया और प्रशासनिक सीमाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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दरअसल हिमाचल की कांग्रेस सरकार ने आज बड़ा कदम उठाते हुए सात नई पंचायतों के गठन और 74 पंचायतों के पुनर्गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। इस फैसले से प्रदेश की ग्रामीण प्रशासनिक संरचना में बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। विभाग ने इस संबंध में प्रभावित पंचायतों और ग्रामीणों से 27 दिसंबर तक आपत्तियां आमंत्रित की हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार यह प्रक्रिया यहीं तक सीमित नहीं रह सकती और आने वाले दिनों में कुछ और पंचायतों के गठन अथवा पुनर्गठन की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विवाद इसलिए गहराया है क्योंकि राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत और शहरी निकाय चुनावों के मद्देनज़र आदर्श चुनाव आचार संहिता की धारा 12.1 लागू कर रखी है, जिसके तहत प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव पर रोक है। इसके बावजूद सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू होने का हवाला देते हुए पंचायत पुनर्गठन की अधिसूचना जारी कर दी। इसे सुक्खू सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के बीच चल रहे टकराव की एक अहम कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
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प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर करवाने को लेकर मामला हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इस पर अगली सुनवाई 30 दिसंबर को प्रस्तावित है। हालांकि अदालत ने फिलहाल पंचायतों के पुनर्गठन या नई पंचायतों के गठन पर कोई सीधी रोक नहीं लगाई है, लेकिन चुनावी माहौल में लिए गए इस फैसले ने कानूनी और प्रशासनिक बहस को तेज कर दिया है।
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, सोलन जिले के धर्मपुर विकास खंड में छह नई पंचायतों—अंबोटा, कामली, धार की बेड, खेड़ा उपरला, रत्योड और चुहूवाल—का गठन किया गया है। इसके अलावा ऊना जिले के हरोली विकास खंड में पंडोगा निचला को नई पंचायत के रूप में अधिसूचित किया गया है। इन नए गठन से संबंधित क्षेत्रों की 14 पंचायतों का पुनर्गठन भी किया जाएगा।
गांवों को एक पंचायत से दूसरी पंचायत में शामिल करने के फैसले के तहत कुल 62 पंचायतों के पुनर्गठन की अधिसूचना भी जारी की गई है। इनमें कांगड़ा और सोलन जिले की 14-14 पंचायतें, हमीरपुर की 12, मंडी की 8, शिमला की 6, ऊना की 4 तथा बिलासपुर और कुल्लू की दो-दो पंचायतें शामिल हैं। इन सभी मामलों में लोगों से आपत्तियां मांगी गई हैं।
आचार संहिता के बीच पंचायतों के पुनर्गठन और नई पंचायतों के गठन के इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। जहां सरकार इसे प्रशासनिक सुधार की प्रक्रिया बता रही है, वहीं विपक्ष और चुनाव आयोग से जुड़े पक्ष इसे चुनावी नियमों के उल्लंघन के तौर पर देख रहे हैं। आने वाले दिनों में हाईकोर्ट की सुनवाई और आपत्तियों की प्रक्रिया तय करेगी कि यह फैसला आगे किस दिशा में जाता है।