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December 23, 2025

IGMC मामला: एक नहीं.. दो डॉक्टरों पर दर्ज हुई FIR, CM सुक्खू ने कल तक मांगी जांच रिपोर्ट

आरोपी डॉक्टर अस्पताल के स्पेशल वार्ड में भर्ती

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CM Sukhu meeting about IGMC case

शिमला। हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) शिमला में डॉक्टर-मरीज विवाद लगातार गंभीर होता जा रहा है। मारपीट के आरोपों से जुड़ा यह मामला अब सरकारए पुलिस और प्रशासन के उच्च स्तर तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पूरे प्रकरण को बेहद गंभीर मानते हुए आरोपी डॉक्टर को निलंबित करने के साथ.साथ कल तक विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। वहीं पुलिसे ने अब इस मामले में आरोपी डॉक्टर सहित एक अन्य डॉक्टर के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर ली है और मामले की जांच तेज कर दी है। 

मुख्यमंत्री ने की अधिकारियों के साथ बैठक

मंगलवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस मामले में उच्च अधिकारियों के साथ बैठक की है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, आईजीएमसी शिमला और निदेशालय चिकित्सा शिक्षा के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आईजीएमसी में हुई इस घटना पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की तथ्यात्मक जानकारी ली और निर्देश दिए कि जांच को 24 दिसंबर तक पूरा कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

 

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मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि चिकित्सा संस्थानों में अनुशासन और पेशेवर आचरण सर्वोपरि है। डॉक्टरों का व्यवहार न केवल उनके व्यक्तित्व को दर्शाता है, बल्कि पूरे संस्थान की साख भी उसी से जुड़ी होती है। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में इस तरह की घटना निंदनीय है और किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पुलिस ने दो डॉक्टरों पर दर्ज की एफआईआर

वहीं इस मामले की जांच कर रही पुलिस ने अब आरोपी डॉक्टर राघव के अलावा एक अन्य डॉक्टर के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर ली है। पीड़िता का आरोप था कि एक डॉक्टर ने उसके साथ मारपीट की। जबकि दूसरे डॉक्टर ने उन्हें टांगों को दबोचा हुआ था। मरीज की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ बीते रोज ही एफआईआर दर्ज कर ली थी। वहीं आज एक दूसरे डॉक्टर के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। वहीं मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए सरकार ने आरोपी डॉक्टर को तुरंत सस्पेंड कर दिया है। 

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पुलिस ने बताया कि इस प्रकरण की जांच एसएसपी स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामले की तह तक जाने की कार्रवाई की जा रही है। सरकार की ओर से आरोपी डॉक्टर को सस्पेंड कर दिया गया हैए जबकि विभागीय और कानूनी कार्रवाई अलग.अलग स्तर पर आगे बढ़ रही है।

क्या है पूरा मामला

पीड़ित अर्जुन सिंह, जो फेफड़ों में संक्रमण के चलते आईजीएमसी में भर्ती थाए ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया है कि मेडिकल जांच के बाद सांस लेने में तकलीफ होने पर उसे पल्मोनरी वार्ड में ऑब्जर्वेशन में रखा गया था। इसी दौरान राउंड पर आए डॉक्टरों ने उससे अभद्र भाषा में बात की और कथित तौर पर मारपीट की। आरोप है कि एक डॉक्टर ने उसके चेहरे और शरीर पर मुक्कों से हमला कियाए जबकि दूसरे डॉक्टर ने उसके पैर पकड़ लिएए जिससे उसकी नाक से खून बहने लगा और जान को खतरा पैदा हुआ।

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आरोपी डॉक्टर अस्पताल में भर्ती

इस बीच, मारपीट मामले में नामजद आरोपी डॉक्टर को भी आईजीएमसी के मेडिकल स्पेशल वार्ड में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि वह मानसिक तनाव और हाथापाई के दौरान लगी चोटों के चलते उपचाराधीन है।

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सरकार का सख्त संदेश

मुख्यमंत्री सुक्खू ने निदेशालय चिकित्सा शिक्षा को यह भी निर्देश दिए कि सीनियर रेजिडेंसी के लिए मेडिकल कॉलेजों में आने वाले डॉक्टरों को अनिवार्य इंडक्शन ट्रेनिंग दी जाए, ताकि पेशेवर आचरण, मरीजों से व्यवहार और संस्थागत अनुशासन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश मिल सकें। सरकार ने साफ कर दिया है कि आईजीएमसी विवाद में दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री द्वारा मांगी गई जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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