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February 24, 2026

सुक्खू सरकार ने स्मार्ट मीटर विरोध के बीच खेला नया दांव, अब पहले इनके घर लगेंगे मीटर

आम जनता के बीच भरोसा कायम करने को सुक्खू सरकार ने लिया बड़ा फैसला

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sukhu govt smart Meter

शिमला। हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट बिजली मीटरों को लेकर जारी भारी विरोध के बीच अब प्रदेश की सुक्खू सरकार ने रणनीतिक फैसला लेते हुए नई पहल की घोषणा की है। लगातार बढ़ती आपत्तियों और भारी भरकम बिजली बिल आने की शिकायतों के बाद अब सुक्खू सरकार ने तय किया है कि सबसे पहले बिजली बोर्ड के कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों के घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इस कदम से आम उपभोक्ताओं के बीच भरोसा कायम करने में मदद मिलेगी।

बिजली बोर्ड ने जारी किए आदेश

हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL) की ओर से कांगड़ा जोन में इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। मुख्य अभियंता (ऑपरेशन) कांगड़ा जोन ने स्पष्ट किया है कि बोर्ड के सभी कार्यरत और रिटायर्ड कर्मचारियों के घरों में प्राथमिकता के आधार पर पुराने मीटर बदले जाएंगे। यहां तक कि जिन आवासों में कनेक्शन किसी अन्य नाम पर है लेकिन वहां कर्मचारी या सेवानिवृत्त कर्मचारी रह रहे हैं, वहां भी प्राथमिकता से स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे।

 

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दबाव के बीच सुक्खू सरकार का नया दांव

सरकार के इस फैसले को सीधे तौर पर जनता के बीच उठ रही आशंकाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रदेश में कई स्थानों पर स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं ने बिजली बिल में अचानक वृद्धि की शिकायत की है। कुछ मामलों में तकनीकी गड़बड़ियों के चलते बिलों में भारी अंतर सामने आया, जिससे विवाद की स्थिति भी बनी। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया, जिसके बाद सरकार पर दबाव बढ़ा।

 

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आदेशों में यह भी कहा गया है कि सभी सहायक अभियंता (AE) इस प्रक्रिया की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करेंगे और साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। साथ ही सेवानिवृत्त कर्मचारियों से अपील की गई है कि वे आम जनता को स्मार्ट मीटरिंग प्रणाली के बारे में जागरूक करें और भ्रांतियों को दूर करने में सहयोग दें।

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कई जगह स्मार्ट मीटरों में आए थे भारी बिल

गौरतलब है कि प्रदेशभर में चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं और शुरुआत व्यावसायिक कनेक्शनों से की गई थी। लेकिन कई जगहों से अधिक बिल आने की शिकायतों ने इस परियोजना को विवादों में ला दिया। ऐसे में सरकार का यह कदम एक तरह से ‘विश्वास निर्माण अभियान’ माना जा रहा है, जिससे यह संदेश दिया जा सके कि यदि व्यवस्था सही है तो सबसे पहले उसे अपने ही तंत्र में लागू किया जाए। अब देखना होगा कि कर्मचारियों के घरों में स्मार्ट मीटर लगाने की इस पहल से जनता की शंकाएं कितनी दूर होती हैं और क्या इससे स्मार्ट मीटरिंग परियोजना को लेकर जारी विरोध थमता है या नहीं।

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