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February 24, 2026
आर्थिक संकट के बीच सुक्खू सरकार जुटाएगी 3 हजार करोड़ का अतिरिक्त राजस्व, जानें क्या है प्लान
सुक्खू सरकार ने आय बढ़ाने को दोहरी नीति पर शुरू किया काम
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शिमला। आर्थिक संकट से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश में अब वित्तीय अनुशासन का नया दौर शुरू हो गया है। राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने आय बढ़ाने और खर्चों पर लगाम कसने की दोहरी रणनीति पर काम तेज कर दिया है। एक ओर जहां विभागों को अनावश्यक खर्चों में तत्काल कटौती के निर्देश दिए गए हैं, वहीं दूसरी ओर आगामी समय में तीन हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटाने का लक्ष्य तय किया गया है।
हाल ही में हुई मंत्रिमंडलीय बैठक में स्पष्ट कर दिया गया कि हर विभाग को यह बताना होगा कि उसने आय बढ़ाने या व्यय कम करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं और उससे वास्तविक लाभ कितना मिला है। वित्त विभाग के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में 3300 करोड़ रुपये कर राजस्व और 1600 करोड़ रुपये गैर.कर राजस्व के माध्यम से जुटाए जा चुके हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह पर्याप्त नहीं है।
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सबसे बड़ी बात यह है कि सरकार सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) के भविष्य पर भी सख्त निर्णय लेने के संकेत दे चुकी है। जिन उपक्रमों का प्रदर्शन लगातार कमजोर रहेगा, उनके बंद करने तक का फैसला लिया जा सकता है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि घाटे में चल रहे संस्थानों को अनिश्चितकाल तक सरकारी सहारे पर नहीं रखा जाएगा, उनकी उपयोगिता और प्रदर्शन के आधार पर ही भविष्य तय होगा।
सरकार ने राजस्व बढ़ाने के लिए कई कदमों पर अमल शुरू कर दिया है। वर्ष 2014 में बंद की गई एक प्रतिशत मार्केट फीस को 12 वर्ष बाद दोबारा लागू किया गया है। प्रदेश के बैरियरों पर टोल दरों में वृद्धि से लगभग 100 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्राप्त होने की उम्मीद है। 26 वर्षों बाद राज्य में लॉटरी दोबारा शुरू करने की तैयारी है, जिससे 100 से 150 करोड़ रुपये सालाना जुटाने का अनुमान है।
जल विद्युत परियोजनाओं पर पहली अप्रैल से राजस्व कर लागू किया जा रहा है, जिससे 1200 से 1800 करोड़ रुपये वार्षिक आय की संभावना है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल कनेक्शन पर मासिक 100 रुपये शुल्क लेने की तैयारी भी की गई है। इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में पर्ची शुल्क 10 रुपये किया गया है और विभिन्न परीक्षणों की दरों में संशोधन की प्रक्रिया जारी है।
बजट सत्र के दौरान उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने विधानसभा में बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में निशुल्क पेयजल आपूर्ति बंद करने का सुझाव आया है। 16वें वित्त आयोग ने भी राज्य को सब्सिडी घटाने या समाप्त करने की सलाह दी है। ऐसे में सरकार रियायतों और अनुदानों की व्यापक समीक्षा कर रही है।
राज्य की वित्तीय स्थिति को संतुलित करने के लिए घाटे वाले 292 बस रूट निजी क्षेत्र को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अधिकारियों के वाहन उपयोग और ई.वाहनों के इस्तेमाल की भी समीक्षा की जा रही है। जिन अधिकारियों के पास एक से अधिक वाहन हैं, उनकी सूची तैयार की जा रही है।
राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से राज्य को सालाना करीब 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। अनुमान है कि आगामी वित्त वर्ष में आय लगभग 42 हजार करोड़ और व्यय 48 हजार करोड़ रुपये रहेगा, यानी छह हजार करोड़ रुपये का सीधा घाटा सामने होगा। मौजूदा वित्त वर्ष में प्रदेश को 3257 करोड़ रुपये आरडीजी के रूप में मिल रहे हैं, जो आगे बंद हो जाएंगे।
प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार के अनुसारए मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आय बढ़ाने और खर्च घटाने के उपाय तत्काल लागू किए जाएं। निकट भविष्य में होने वाली मंत्रिमंडल बैठक में प्रत्येक विभाग को अपनी कार्ययोजना और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।