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February 24, 2026
हिमाचल के स्कूल में रमजान पर भाषण: आदाब और उर्दू शब्दों का इस्तेमाल- अब मांगनी पड़ी माफी
सोशल मीडिया पर वायरल हुई छात्रा की वीडियो
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सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में स्थित एक निजी स्कूल की प्रार्थना सभा इन दिनों प्रदेशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। एक छात्रा द्वारा रमजान पर दिए गए भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया।
वीडियो वायरल होने का बाद जहां स्कूल प्रबंधन ने इसे शैक्षणिक गतिविधि बताते हुए खेद जताया है। वहीं, स्थानीय हिंदू नेता ने इसे सुनियोजित प्रयास करार देते हुए कार्रवाई की मांग उठाई है।
दरअसल, ददाहू के AKM पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल की सुबह की प्रार्थना सभा में 11वीं कक्षा की एक छात्रा ने रमजान के महत्व पर भाषण दिया। छात्रा ने अपने संबोधन की शुरुआत “आदाब” और “सुप्रभात” से की और फिर रमजान के धार्मिक व सामाजिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उसने रोजे, संयम, दान और भाईचारे की भावना को रमजान का मूल संदेश बताया।
कार्यक्रम का वीडियो स्कूल प्रबंधन द्वारा ही अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर साझा किया गया था। हालांकि, कुछ लोगों द्वारा आपत्ति जताए जाने के बाद वीडियो हटा लिया गया। इसके बाद यह वीडियो अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैल गया और बहस छिड़ गई।
स्कूल प्रबंधन के पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार ने कहा कि छात्रा का भाषण पाठ्यक्रम से प्रेरित था और इसे एक नियमित शैक्षणिक गतिविधि के तहत प्रस्तुत किया गया। उनके अनुसार अगर इस वीडियो से किसी भी समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं तो हम उसके लिए खेद प्रकट करते हैं।

स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्य विजय कुमार ने स्पष्ट किया कि 11वीं कक्षा की हिंदी पुस्तक “अंतरा” के संदर्भ से यह वक्तव्य तैयार किया गया था। उन्होंने कहा कि यह गतिविधि विद्यार्थियों में विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के प्रति समझ विकसित करने के उद्देश्य से करवाई जाती है।
वायरल वीडियो में छात्रा रमजान को त्याग, अनुशासन और भाईचारे का पर्व बताते हुए कहती है कि यह महीना इंसान को आत्मसंयम और दूसरों की मदद करने की सीख देता है। उसने यह भी कहा कि रमजान हमें आपसी सद्भाव और मानवता का संदेश देता है। हालांकि, कुछ लोगों ने प्रार्थना सभा में इस विषय के चयन पर आपत्ति जताई और इसे एकतरफा प्रस्तुति बताया।
स्थानीय हिंदू नेता कमल गौतम ने स्कूल प्रबंधन की दलीलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि 11वीं की हिंदी पुस्तक “अंतरा” में गद्य और काव्य खंड शामिल हैं। गद्य खंड में मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी ‘ईदगाह’ भी है, जो एक छोटे बच्चे हामिद और उसकी दादी के स्नेह और त्याग की मार्मिक कथा है।
उन्होंने तर्क दिया कि ‘ईदगाह’ कहानी में ईद के अवसर का वर्णन है, न कि रमजान के विस्तृत धार्मिक विवरण का। उनके अनुसार, “प्रार्थना सभा में जिस प्रकार से रमजान का वर्णन किया गया, वह पाठ्यपुस्तक की सामग्री से मेल नहीं खाता। यह एक प्रयोग था, जिसे विरोध के बाद रोकना पड़ा।”
कमल गौतम ने आरोप लगाया कि संबंधित शिक्षिका ने जानबूझकर एक विशेष मानसिकता के साथ यह भाषण तैयार करवाया और अब विद्यालय प्रबंधन उन्हें बचाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
यह मामला अब केवल एक स्कूल गतिविधि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक विषयों की प्रस्तुति को लेकर व्यापक चर्चा का रूप ले चुका है। एक पक्ष इसे विविधता और आपसी समझ बढ़ाने की पहल मान रहा है, तो दूसरा पक्ष इसे अनुचित मंच पर धार्मिक प्रचार के रूप में देख रहा है।
फिलहाल, स्कूल प्रबंधन ने सार्वजनिक रूप से खेद जताते हुए मामले को शांत करने की कोशिश की है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर बहस जारी है। प्रशासन की ओर से अभी तक किसी आधिकारिक जांच या कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।