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May 24, 2025
हिमाचल की शर्तों पर चलेंगे ये 4 बिजली प्रोजेक्ट, CM सुक्खू की सख्ती ने बढ़ाई प्रदेश की आर्थिकी
हिमाचल की आर्थिकी को देंगे नया ऊर्जा बल
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शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल सरकार प्रदेश की आर्थिक मजबूती के लिए अब निर्णायक और सख्त फैसले ले रही है। जिसका असर भी देखने को मिल रहा है। सुक्खू सरकार ने इसी कड़ी में एक सख्त फैसला हिमाचल में स्थित बिजली प्रोजेक्टों पर भी लिया था। सुक्खू सरकार ने एसजेवीएन और एनएचपीसी के तहत चार बिजली प्रोजेक्टों को अपने अधीन लेने का बड़ा फैसला लिया था।
इन चारों बिजली प्रोजेक्टों को अब प्रदेश सरकार की शर्तों पर संचालित किया जाएगा। जिससे हिमाचल को मुफ्त बिजली के रूप में बड़ा लाभ मिलेगा और दीर्घकालीन राजस्व सृजन का मार्ग प्रशस्त होगा। यह चारों बिजली प्रोजेक्ट सुन्नी, लुहरी, धौलासिद्ध और डुगर परियोजना हैं। जिनका सरकार अधिग्रहण करने जा रही है।
प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि कोई भी कंपनी यदि राज्य की नई ऊर्जा नीति का पालन नहीं करती है, तो उसे परियोजना लौटानी होगी। यही नहीं सरकार अब एसजेवीएन की सुन्नी (382 मेगावाट), लुहरी स्टेज-1 (210 मेगावाट), धौलासिद्ध (66 मेगावाट) और एनएचपीसी की डुगर (500 मेगावाट) जैसी अहम परियोजनाएं अपने अधीन लेने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
सरकार की योजना है कि इन परियोजनाओं से 12%, 18% और 30% के अनुपात में निशुल्क बिजली ली जाएगी, जिससे प्रदेश को अरबों रुपए की वार्षिक ऊर्जा आय सुनिश्चित होगी। साथ ही तय अवधि (40 वर्ष) के बाद ये सभी परियोजनाएं प्रदेश के स्वामित्व में लौट आएंगी, जिससे दीर्घकालीन आत्मनिर्भरता भी सुनिश्चित होगी।
सुक्खू सरकार के इस रुख के बाद कई नए निजी निवेशकों ने इन परियोजनाओं में रुचि दिखाई है और प्रदेश सरकार की शर्तों पर काम करने को सहमति दी है। यह दर्शाता है कि सुक्खू सरकार की पारदर्शी और दृढ़ नीतियों के चलते अब प्रदेश एक आकर्षक निवेश गंतव्य बनता जा रहा है। जिससे आने वाले समय में प्रदेश को काफी लाभ मिलने वाला है।
पूर्व की जयराम सरकार द्वारा परियोजनाएं आवंटित करने में नियमों में की गई ढील को लेकर मौजूदा सरकार ने आलोचना करते हुए कहा है कि सार्वजनिक संसाधनों का दोहन अब किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के संसाधनों पर पहला अधिकार हिमाचलियों का है। हम किसी भी शर्त पर अपने प्राकृतिक संसाधनों को औने.पौने दामों में नहीं लुटने देंगे। अब हर परियोजना राज्य के हित को ध्यान में रखकर चलाई जाएगी।
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ऊर्जा विभाग का आकलन है कि इन परियोजनाओं के माध्यम से राज्य सरकार को प्रतिवर्ष सैकड़ों करोड़ की बचत व आय होगी, जो राज्य के विकास कार्यों में लगाई जा सकेगी। साथ ही, स्थानीय रोजगार सृजन, ग्रामीण विकास और आधारभूत ढांचे में निवेश के रास्ते भी खुलेंगे। सुक्खू सरकार की यह नीति बदलाव केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि हिमाचल की आर्थिकी को स्थायित्व और समृद्धि की ओर ले जाने वाला एक मजबूत कदम है। यदि यही रुख बरकरार रहता है, तो आने वाले वर्षों में राज्य न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होगा, बल्कि राजस्व और सामाजिक विकास के क्षेत्र में भी उदाहरण पेश करेगा।