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August 4, 2025
हिमाचल: उफान पर बह रहे नाले ने बदला रूख, 13 परिवारों पर मंडराया खतरा; जाग कर बिताई पूरी रात
पत्थरों से बंद हो गई पुलिया, घरों की तरफ मुड़ा पानी का बहाव
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मंडी। हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून जमकर कहर ढा रहा है। बड़ी बात तो यह है कि मानों मानसून ने तबाही के लिए मंडी जिला को खास तौर पर चुना है। इस मानसून सीजन में प्रदेश के मंडी जिला में सबसे अधिक तबाही हुई है। वहीं सबसे अधिक मौतें भी मंडी जिला में ही हुई हैं। प्रदेश भर में भारी बारिश का दौर जारी है। जिसमें मंडी जिला में एक बार फिर लोगों ने अपनी आंखों के सामने तबाही को देखा है।
दरअसल मंडी जिले के पंडोह व आसपास के इलाकों में बीती रात हुई मूसलाधार बारिश से स्थिति भयावह हो गई। खासकर नेशनल हाईवे पर लोअर 9 मील के पास जागर नाले का जलस्तर अचानक उफान पर आ गया। जिसने आसपास के लोगों की नींद उड़ा दी। लोगों ने पूरी रात खतरे की आशंका को देखते जाग कर काटी।
ग्रामीणों का कहना है कि जागर नाले का जलस्तर बढने से और तेज बहाव के साथ बड़े.बड़े पत्थर और मलबा हाईवे पर आकर पुलिया के नीचे फंस गए और पुलिया को पूरी तरह से बंद कर दिया। इससे जल प्रवाह का प्राकृतिक मार्ग बाधित हो गया और पानी आवासीय क्षेत्र की ओर मुड़ गया, जिससे लगभग 13 परिवारों की रात भर नींद उड़ गई।
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स्थानीय निवासी सूरत राम ने बताया कि 2023 की आपदा के दौरान रंग में फंसे मलबे की वजह से नाले का प्राकृतिक मार्ग बाधित हो गया है, जिससे पानी बार.बार अपनी दिशा बदल रहा है और आवासीय इलाकों के लिए जोखिम पैदा हो रहा है। उन्होंने एनएचएआई व निर्माण कंपनी को कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होने की गंभीर समस्या उठाई।
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बता दें कि मौसम विभाग ने आज प्रदेश के छह जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इतना ही नहीं अगले दो दिन भी प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश का अनुमान है। ऐसे में प्रदेश के नदी नाले उफान पर बह रहे हैं और उनका जलस्तर और बढ़ने की संभावना है। जिसको देखते हुए मौसम विभाग और सभी जिला प्रशासन ने लोगों को नदी नालों से दूर रहने और अलर्ट पर रहने की अपील की है।
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प्रदेश में पिछले कई दिनों से लगातर हो रही बारिश से प्रदेश की लगभग 295 सड़कों पर वाहनों की आवाजाही बंद हो चुकी है। बारिश के चलते कई जगह लैंडस्लाइड हुए हैं। जिससे सड़क मार्ग बाधित हो रहे हैं। प्रदेश में मानसून सीजन में अब तक 184 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 31 लोगों की जान बाढ़, लैंडस्लाइड और बादल फटने से हुई है, जबकि 36 लोग लापता हैं।
इस मानसून सीजन में अब तक 1714 करोड़ रुपए की सरकारी व निजी संपत्ति भी नष्ट हो गई है। प्रदेश में 457 घर पूरी तरह जमींदोज हो चुके हैं, जबकि 1192 घरों को आंशिक नुकसान हुआ है। आंशिक नुकसान वाले घरों में भी बड़ी संख्या में ऐसे मकान है जो खड़े जरूर है, लेकिन रहने योग्य नहीं बचे।