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November 21, 2025

हिंदू संगठनों की चेतावनी: संजौली मस्जिद में आज नहीं होने देंगे जुमे की नमाज, बड़े बवाल की अशंका

देवभूमि संघर्ष समिति की अभिभावकों से बच्चों को स्कूल ना भेजने की अपील

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Sanjauli Masjid Shimla

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के बहुचर्चित संजौली मस्जिद मामले ने तूल पकड़ लिया है। कभी मिलजुल कर रहने वाले हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों को इस मामले ने आमने सामने ला खड़ा कर दिया है। अब दोनों समुदाय अब एक दूसरे के विरोध में उतर आए हैं। संजौली मस्जिद विवाद अब एक बार फिर उबाल पर है।

शिमला में हो सकता है बड़ा बवाल

आज यानी शुक्रवार को जुमे की नमाज के दिन एक बार फिर संजौली में बड़ा बवाल होने की आशंका है। जिसका कारण हिंदू संगठनों की चेतावनी है। दरअसल, चार दिन से आमरण अनशन पर बैठे देवभमि संघर्ष समिति के लोगों ने शुक्रवार को अवैध घोषित संजौली मस्जिद में मुस्लिमों को जुमे की नमाज नहीं पढ़ने देने की चेतावनी जारी कर दी है। 

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हिंदू संगठनों को चेतावनी

समिति के नेताओं ने चेतावनी दी है कि आज जुमे की नमाज के दौरान किसी भी हाल में नमाज नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि सुरक्षा को देखते हुए वे अपने बच्चों को स्कूल न भेजें। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि पुलिस ने लाठीचार्ज किया तो उसका जवाब भी दिया जाएगा।

आमने-सामने दो समुदाय

संघर्ष समिति के बयान के बाद आज बड़े बवाल की आशंका स्पष्ट रूप से बढ़ गई है। दो समुदायों के बीच अविश्वास और आक्रोश लगातार बढ़ रहा है, जिससे हालात बेहद संवेदनशील बन चुके हैं। समिति का कहना है कि यदि कल कोई अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।

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नहीं पढ़ने देंगे जुमे की नमाज

दरअसल, पिछले शुक्रवार को स्थानीय महिलाओं और देवभूमि संघर्ष समिति के लोगों ने बाहरी राज्यों के लोगों को अवैध घोषित संजौली मस्जिद में जुमे की नमाज पढ़ने से रोक दिया था। इन लोगों ने बाहरी राज्यों के लोगों को मस्जिद के अंदर नहीं जाने दिया। जिसके चलते कई मुस्लिमों को बिना नमाज पढ़े ही वापस लौटना पड़ा था। हालांकि इस दौरान कुछ लोगों के बीच तीखी बहस भी हुई थी।

6 लोगों पर FIR

इसके बाद पुलिस ने तीन महिलाओं सहित छह लोगों पर धार्मिक भावनाएं आहत करने और माहौल बिगाड़ने के आरोप में FIR दर्ज की थी। जिससे नाराज देवभूमि संघर्ष समिति ने संजौली थाना के बाहर तंबू गाड़ कर आमरण अनशन शुरू कर दिया है।

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थाने के बाहर गाढ़ा तंबू

पिछले चार दिन से आमरण अनशन पर बैठे समिति के लोगों ने उन पर दर्ज FIR को रद्द करने, अवैध घोषित मस्जिद का बिजली पानी काटने और मुस्लिम समुदाय की आवाजाही पर रोक लगाने जैसी मांगे उठाई हैं।

कोर्ट के फैसले का हो पालन

संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारियों मदन ठाकुर और विजय शर्मा का कहना है कि हम कोर्ट के आदेशों का पालन करवाना चाहते हैं, लेकिन प्रशासन उदासीन बना हुआ है। समिति का कहना है कि जब तक प्रशासन बिजली-पानी काटने और आरोपियों पर दर्ज FIR वापस लेने का फैसला नहीं लेता, आंदोलन तेज किया जाएगा।

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आज के लिए पुलिस हाई अलर्ट पर

वहीं, पुलिस मामले को कानून-व्यवस्था का मुद्दा मानते हुए स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात किया गया है और धारा 144 लागू करने पर भी चर्चा चल रही है।

क्या है पूरा विवाद?

  • 31 अगस्त 2024

मैहली में झगड़े में शामिल कुछ लोग संजौली मस्जिद में शरण लेने लगे, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा हुआ। अगले दिन बड़ी संख्या में प्रदर्शन हुए और मामला पूरे शहर में फैल गया।

  • 11 सितंबर 2024

संजौली में स्थिति इतनी बेकाबू हुई कि पुलिस को पानी की बौछार और हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इस दौरान मस्जिद को गिराने की मांग तेज हो गई। 12 सितंबर को मस्जिद कमेटी खुद निगम कमिश्नर कोर्ट पहुंची और अवैध हिस्से को तोड़ने की पेशकश की।

 

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  • 5 अक्टूबर 2024

नगर निगम आयुक्त ने मस्जिद की ऊपरी तीन मंजिलें गिराने के आदेश दिए। दो मंजिलें गिराई भी गईं।

  • 3 मई 2025

निगम आयुक्त ने मस्जिद की पूरी संरचना को अवैध बताते हुए पूरा ढांचा हटाने का निर्देश दिया। मस्जिद कमेटी और वक्फ बोर्ड ने आदेश के खिलाफ जिला अदालत में अपील की। 30 अक्टूबर 2025 को अदालत ने अपील खारिज करते हुए नगर निगम के आदेश को सही ठहराया।

  • 14 नवंबर 2025

देवभूमि संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं ने बाहरी मुस्लिमों को मस्जिद में जाने से रोका। बहसबाजी के बाद पुलिस ने छह लोगों पर FIR कर दी, जिसने हालात फिर तनावपूर्ण कर दिए।

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