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August 4, 2025

हिमाचल: किन्नर कैलाश से मणिमहेश तक, इन यात्राओं में मिलता है शिव का साक्षात आशीर्वाद

आसान नहीं होती ये यात्राएं

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Himachal Religious Trek

शिमला। हिमाचल प्रदेश में कुछ ऐसे ट्रेक हैं जो मात्र एंजॉयमेंट के लिए नहीं हैं। इन ट्रेकों पर जाना अपने आम में एक ऐसा आध्यात्मिक एहसास है जो कहीं और महसूस नहीं किया जा सकता। आइए जानते हैं ऐसी 3 धार्मिक यात्राओं के बारे में।

1. किन्नर कैलाश यात्रा (जिला किन्नौर)

हिमाचल की सबसे प्रसिद्ध यात्राओं में से एक है किन्नर कैलाश यात्रा। इसे बेहद कठिन धार्मिक यात्रा भी माना गया है। ये प्रदेश की सबसे पवित्र तीर्थ यात्राओं में से एक है। ये यात्रा भगवान शिव को समर्पित है।  इस यात्रा के जरिए आप किन्नर कैलाश पर्वत पर स्थित शिवलिंग के दर्शन करते हैं। ये शिवलिंग 79 फीट ऊंचा एक चट्टान है। खास बात ये है कि ये हर मौसम में रंग बदलता है। 

5 दिन में होता है ट्रेक

किन्नौर जिले में होने वाली इस यात्रा का ट्रेक किन्नर कैलाश पर्वत की दुर्गम चोटियों से होकर गुजरता है। इस यात्रा को पूरा करने में 3 से 5 दिन का वक्त लगता है और इसमें लगभग 30-40 किलोमीटर का ट्रेक शामिल है जो कठिन होता है। इसी लिए इस यात्रा को आस्था और साहस का प्रतीक माना जाता है। 

 

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पांडवों से है संबंध

किन्नर कैलाश पर्वत शिव भगवान का निवास माना जाता है। इस जगह को पांडवों से भी जोड़ा जाता है। कहते हैं अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां समय बिताया था।

2. श्रीखंड महादेव यात्रा (जिला कुल्लू)

कुल्लू जिले में होने वाली इस यात्रा को कठिन पवित्र यात्राओं में से एक माना जाता है। ये यात्रा 18,570 फीट की ऊंचाई पर एक पर्वत शिखर तक पैदल ट्रेक करके पूरी होती है। शिखर पर शिवलिंग स्थापित है जो प्राकृतिक है। इसी शिवलिंग के दर्शन के लिए इस यात्रा पर जाया जाता है। इस यात्रा को एक पौराणिक कथा से जोड़ा जाता है।

 

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32 किलोमीटर लंबी है यात्रा

कथा के मुताबिक भगवान शिव ने भस्मासुर की वजह से इस शिखर की शरण ली थी। भस्मासुर को शिव भगवान ने वरदान दिया कि वो जिसके भी सिर पर हाथ रखेगा वो भस्म हो जाएगा। ऐसे में भस्मासुर भगवान शिव के ही पीछे भागने लगा जिससे भगवान शिव इस शिखर पर पहुंचे और मोहिनी रूप धारण कर भस्मासुर का वध किया। ये यात्रा करीब 32 किलोमीटर लंबी है। इसे पूरा करने के लिए 5 से 7 दिन का वक्त लगता है। ये यात्रा कठिन मानी जाती है।

3. मणिमहेश यात्रा (जिला चंबा)

चंबा जिले की ये यात्रा मणिमहेश झील और मणिमहेश कैलाश पर्वत तक जाने के लिए की जाती है। इस झील में स्नान कर यात्रा को पूर्ण माना जाता है। माना जाता है कि इससे पाप धुलते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

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14 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई

इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भी भगवान शिव से आर्शीवाद पाना है। इस यात्रा की शुरूआत भरमौर से होती है। फिर ये हड़सर गांव पहुंचती है जहां से झील तक के लिए लगभग 14 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई वाला ट्रेक करना पड़ता है।

स्नान से धुल जाते हैं पाप

मणिमहेश की यात्रा के वक्त भक्त गौरी कुंड और शिव कुंड में स्नान करते हैं। इसके बाद मणिमहेश झील में डुबकी लगाते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां स्नान करने से कष्ट दूर होते हैं। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव ने मां पार्वती से विवाह के बाद कैलाश पर्वत बनाया था। आज भी ये उनका दिव्य निवास है।

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