#हादसा
August 13, 2026
गहरी नींद में मंत्री विक्रमादित्य का विभाग : रेणुकाजी की सड़कें बनीं जा*नलेवा, कई लोग गंवा चुके जिंदगी
लोगों का सरकार पर फूटा गुस्सा, उठाए कई गंभीर सवाल
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सिरमौर। पहाड़ों में सफर पहले ही जोखिम भरा माना जाता है। मगर जब सड़क ही खतरा बन जाए तो हर सफर चिंता में बदल जाता है। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला स्थित रेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र में लगातार हो रहे सड़क हादसों ने इसी डर को गहरा कर दिया है।
लोक निर्माण विभाग के संगड़ाह डिवीजन के तहत आने वाली सड़कों पर पिछले सात महीनों में 28 लोगों की जान जा चुकी है। ताजा हादसे में चार लोगों की मौत और नौ लोगों के घायल होने के बाद अब क्षेत्र की सड़कों की हालत पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
रेणुकाजी क्षेत्र की खास बात यह भी है कि यह हिमाचल के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत परमार का विधानसभा क्षेत्र रहा है और वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विनय कुमार भी यहीं से विधायक हैं। लगातार सामने आ रहे हादसों के कारण स्थानीय लोगों में सड़क सुरक्षा और रखरखाव को लेकर नाराजगी बढ़ रही है।
ताजा हादसा गतलोग के पास मंगलवार देर रात हुआ। संगड़ाह अस्पताल से एक शव को अरलू गांव ले जा रही बोलेरो कैंपर अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे गहरी खाई में जा गिरी। वाहन में सवार चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चालक समेत नौ लोग घायल हो गए।
मृतकों की पहचान राजेंद्र (37), देशराज (23), रिखी राम (58) और राम गोपाल (62) के रूप में हुई है। हादसे में घायल बृज मोहन, कृपा राम, देवेंद्र सिंह, सुनील शर्मा, राम स्वरूप, जय प्रकाश, संदीप, कमलेन्द्र और चालक कपिल देव को अस्पताल पहुंचाया गया। इनमें चार गंभीर घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज नाहन रेफर किया गया।
लगातार हो रही इन दुर्घटनाओं के बाद स्थानीय लोग अब सड़कों की स्थिति को लेकर सवाल उठा रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि गतलोग हादसा कोई अकेली घटना नहीं है। इससे पहले-
हरिपुरधार बस हादसे के बाद सड़क व्यवस्था को लेकर क्षेत्र में पहले भी आवाजें उठी थीं। अब गतलोग हादसे के बाद एक बार फिर PWD डिवीजन संगड़ाह के अंतर्गत आने वाली सड़कों की स्थिति चर्चा में है। स्थानीय लोग और वाहन चालक कई सड़कों को खराब और जोखिम भरा बताते हुए इनके सुधार की मांग कर रहे हैं।
हालांकि पुलिस और SDM संगड़ाह की मजिस्ट्रेट जांच में अलग-अलग हादसों के अलग-अलग कारण सामने आए हैं। इसलिए हर दुर्घटना के लिए सिर्फ सड़क की स्थिति को जिम्मेदार ठहराना जांच के निष्कर्षों से पहले उचित नहीं होगा। लेकिन हादसों की लगातार संख्या ने सड़क सुरक्षा, रखरखाव और दुर्घटना संभावित स्थानों पर जरूरी सुधार की जरूरत जरूर बढ़ा दी है।
गतलोग हादसे के बाद प्रशासन ने मृतकों के आश्रितों को तत्काल राहत के तौर पर 25-25 हजार रुपये जारी किए हैं। वहीं गंभीर घायलों को बेहतर उपचार के लिए नाहन रेफर किया गया है।
अब बड़ा सवाल यही है कि पिछले सात महीनों में 28 लोगों की जान जाने के बाद क्या संगड़ाह डिवीजन की सड़कों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा होगी और दुर्घटना संभावित हिस्सों को चिन्हित कर उनमें स्थायी सुधार किए जाएंगे?