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August 5, 2026

रंग लाई मंत्री विक्रमादित्य की मेहनत : केंद्र से PMGSY के बजट में बड़ा इजाफा- मिलेंगे 2247 करोड़

मंत्री विक्रमादित्य ने केंद्र के समक्ष उठाया था मामला

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Vikramaditya Singh

शिमला। हिमाचल प्रदेश के दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क मजबूत करने की दिशा में बड़ी राहत मिली है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना यानि PMGSY के तहत राज्य में बनने वाली सड़कों के लिए केंद्र सरकार ने निर्माण लागत की सीमा बढ़ा दी है। अब जहां पहले प्रति किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए करीब 90 लाख रुपये तक का प्रावधान था, वहीं संशोधित व्यवस्था में यह राशि बढ़कर 1.60 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर तक हो गई है।

PMGSY चरण-4 के लिए 2247 करोड़ की मंजूरी

पहाड़ी राज्य हिमाचल में सड़क निर्माण की लागत मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अधिक आती है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, पहाड़ों की कटिंग, सुरक्षा कार्य और निर्माण सामग्री को साइट तक पहुंचाने की चुनौतियां परियोजनाओं को महंगा बनाती हैं। ऐसे में बढ़े हुए बजट को ग्रामीण सड़क परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के तहत हिमाचल प्रदेश के लिए केंद्र सरकार ने 2,247 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। इस बजट से प्रदेश में कुल 294 सड़कों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इन परियोजनाओं में से 235 सड़कों के टेंडर अवार्ड किए जा चुके हैं, जबकि 59 सड़क परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया अभी अटकी हुई है। विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन लंबित परियोजनाओं के लिए ठेकेदारों को आकर्षित करना है।

59 सड़कों के टेंडर में नहीं आ रहे ठेकेदार

PMGSY के तहत स्वीकृत कई सड़क परियोजनाओं के टेंडर में ठेकेदारों की पर्याप्त रुचि नहीं दिख रही है। बताया जा रहा है कि 59 सड़कों के लिए ठेकेदार आवेदन नहीं कर रहे हैं। कई मामलों में केवल एक ही टेंडर प्राप्त होने के कारण लोक निर्माण विभाग को प्रक्रिया रद्द करनी पड़ रही है। इसके बाद इन परियोजनाओं के लिए दोबारा टेंडर आमंत्रित किए जा रहे हैं। विभाग के सामने यह चुनौती इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सड़कें मुख्य रूप से ऐसे इलाकों में बननी हैं, जहां भौगोलिक परिस्थितियां निर्माण कार्य को सामान्य क्षेत्रों की तुलना में कठिन बना देती हैं।

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PMGSY चरण-4 के तहत प्रदेश के कई जिलों में सड़क परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें शिमला जिले में सबसे अधिक सड़क परियोजनाएं शामिल बताई जा रही हैं। इसके अलावा डलहौजी, मंडी, तीसी और भटियात सहित विभिन्न क्षेत्रों की कुछ सड़क परियोजनाओं के टेंडर भी प्रक्रिया में अटकने की बात सामने आई है। विभाग के सामने क्लास-वन ठेकेदारों की ओर से अपेक्षित रुचि नहीं दिखाना भी एक चुनौती बन रहा है। सिंगल टेंडर आने की स्थिति में प्रक्रिया आगे बढ़ाना मुश्किल हो जाता है और कई बार टेंडर रद्द कर फिर से निविदा जारी करनी पड़ती है।

मंत्री विक्रमादित्य ने केंद्र के समक्ष उठाया था मामला

PMGSY परियोजनाओं में ठेकेदारों की कम रुचि के पीछे सिर्फ निर्माण लागत ही वजह नहीं है। योजना के तहत सड़क निर्माण पूरा करने के बाद पांच वर्षों तक सड़क के रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी भी ठेकेदार की होती है। यानी ठेकेदार को केवल सड़क बनाकर काम खत्म नहीं करना होता, बल्कि तय अवधि तक उसकी गुणवत्ता और रखरखाव की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश, भूस्खलन, बर्फबारी और अन्य प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण सड़क की मेंटेनेंस लागत बढ़ सकती है।

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इसी वजह से कुछ परियोजनाएं ठेकेदारों के लिए आर्थिक रूप से कम आकर्षक साबित हो रही हैं। हिमाचल में PMGSY सड़कों की निर्माण लागत और परियोजनाओं में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों का मुद्दा लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के समक्ष उठाया था। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण की वास्तविक लागत को देखते हुए प्रति किलोमीटर उपलब्ध बजट बढ़ाने की मांग लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। अब बजट में बढ़ोतरी से विभाग को उम्मीद है कि जिन परियोजनाओं में वित्तीय व्यवहार्यता बड़ी चुनौती थी, उनमें काम आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

ग्रामीण क्षेत्रों को सीधे मिलेगा फायदा

PMGSY का मुख्य उद्देश्य ऐसे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध करवाना है, जहां अभी भी मजबूत ऑल-वेदर कनेक्टिविटी की आवश्यकता है। सड़क संपर्क बेहतर होने का सीधा असर ग्रामीण लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। बेहतर सड़कें होने से स्कूल और कॉलेज तक पहुंच, अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों तक आवाजाही, कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलती है।

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विशेषकर हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में सड़क सिर्फ परिवहन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और स्थानीय कारोबार की जीवनरेखा भी है। बढ़े हुए बजट प्रावधानों के बाद लोक निर्माण विभाग ने अधिकारियों को संशोधित प्रावधानों के अनुसार आगामी टेंडर प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। विभाग का प्रयास है कि जिन सड़कों के टेंडर ठेकेदारों की कमी के कारण अटके हैं, उन्हें दोबारा निविदा प्रक्रिया में लाकर जल्द से जल्द काम शुरू करवाया जाए।

कितनी तेजी से जमीन पर उतरती हैं परियोजनाएं

लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर इन चीफ नरेंद्र पॉल के अनुसार PMGSY चरण-4 में अधिकांश सड़कों के टेंडर किए जा चुके हैं। कुछ परियोजनाओं के टेंडर ठेकेदारों के आगे नहीं आने के कारण नहीं हो पाए हैं। ऐसी सड़कों के लिए दोबारा टेंडर प्रक्रिया अपनाई जा रही है। केंद्र से बढ़ी हुई निर्माण लागत की मंजूरी और PMGSY चरण-4 के लिए 2,247 करोड़ रुपये के प्रावधान ने हिमाचल की ग्रामीण सड़क परियोजनाओं के लिए रास्ता जरूर आसान किया है।
हालांकि, असली चुनौती अब उन 59 परियोजनाओं की है, जिनके लिए ठेकेदार आगे नहीं आ रहे हैं। यदि विभाग दोबारा टेंडर प्रक्रिया में पर्याप्त प्रतिस्पर्धा पैदा करने में सफल रहता है, तो लंबे समय से अटकी कई ग्रामीण सड़क परियोजनाएं जमीन पर उतर सकती हैं।

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