#राजनीति
March 5, 2026
हिमाचल : राज्यसभा चुनाव के लिए आज होगा नामांकन- कांग्रेस में मंत्री धनीराम और प्रतिभा का नाम आगे
यह चुनाव सिर्फ एक सीट का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा का भी सवाल बन गया है
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट के लिए 16 मार्च को मतदान होना है और जैसे-जैसे नामांकन की अंतिम तिथि नजदीक आई है, सियासी हलचल तेज होती जा रही है। 5 मार्च यानी आज नामांकन दाखिल करने का आखिरी दिन है।
इसी कड़ी में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने गुरुवार सुबह 11 बजे विधायक दल की अहम बैठक बुलाई है, जिसमें पार्टी अपने उम्मीदवार के नाम पर अंतिम मुहर लगाएगी। CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने साफ संकेत दे दिए हैं कि इस बार कांग्रेस का उम्मीदवार हिमाचल प्रदेश से ही होगा।
CM ने कहा कि उम्मीदवार को लेकर किसी तरह का सस्पेंस या डर की स्थिति नहीं है और नामांकन के समय तस्वीर साफ हो जाएगी। CM सुक्खू ने इशारों-इशारों में पिछले राज्यसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि लोकतंत्र को खरीदने की कोशिशें इस बार सफल नहीं होंगी। उनका यह बयान राजनीतिक मायने रखता है, क्योंकि बीते साल हुए चुनाव में अप्रत्याशित नतीजे सामने आए थे।
हिमाचल विधानसभा में कुल 68 सदस्य हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 35 या उससे अधिक विधायकों का समर्थन जरूरी है। मौजूदा समय में कांग्रेस के पास 40 विधायक हैं, जिससे पार्टी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रही है। संख्या के लिहाज से देखें तो कांग्रेस की स्थिति मजबूत है, लेकिन पिछले अनुभव ने पार्टी को सतर्क कर दिया है।
27 फरवरी 2024 को हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद पार्टी उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी को हार का सामना करना पड़ा था। उस चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार हर्ष महाजन विजयी हुए थे।
उस समय 3 निर्दलीय और 6 कांग्रेस विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग किए जाने से समीकरण पलट गए थे। इस अप्रत्याशित परिणाम ने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया था और कांग्रेस सरकार को गंभीर राजनीतिक संकट का सामना करना पड़ा था।
इस बार BJP ने अभी तक अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि पार्टी वर्तमान परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए है और फिलहाल ज्यादा छेड़छाड़ करने के मूड में नहीं है।
हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अंतिम समय तक रणनीति बदलना हिमाचल की राजनीति में कोई नई बात नहीं है। इसलिए कांग्रेस सतर्क है और अपने विधायकों को एकजुट रखने की कवायद तेज कर दी गई है।
यह चुनाव सिर्फ एक सीट का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा का भी सवाल बन गया है। कांग्रेस जहां अपनी एकजुटता और बहुमत की ताकत दिखाना चाहती है, वहीं BJP भी हालात पर पैनी नजर रखे हुए है।
पिछली बार की क्रॉस वोटिंग की घटना ने सत्तारूढ़ दल को सबक दिया है, इसलिए इस बार पार्टी स्तर पर अनुशासन और रणनीति दोनों पर खास ध्यान दिया जा रहा है। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस किस चेहरे पर भरोसा जताती है और क्या यह चुनाव बिना किसी सियासी उलटफेर के शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो पाता है या नहीं।