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January 9, 2026

हिमाचल BREAKING : HC से सरकार को बड़ा झटका, नहीं टलेंगे पंचायत चुनाव- 30 अप्रैल से पहले होंगे

हाईकोर्ट ने सरकार और चुनाव आयोग को दी सख्त समयसीमा

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HIMCHAL HIGHCOURT DECISION

शिमला। लगातार टलते पंचायत चुनावों को लेकर चल रही खींचतान पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आखिरकार विराम लगा दिया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि संवैधानिक संस्थाओं को अनिश्चितकाल तक लटकाया नहीं जा सकता। इसी के साथ हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिए हैं कि पंचायत चुनाव हर हाल में 30 अप्रैल से पहले कराए जाएं। अदालत ने पंचायतीराज विभाग, राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को आपस में समन्वय बनाकर चुनाव समय पर करवाने की रणनीति तैयार करने को भी कहा है।

हाईकोर्ट का स्पष्ट आदेश: 30 अप्रैल से पहले हो चुनाव

इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने की। शुक्रवार सुबह सुनाए गए फैसले में अदालत ने निर्देश दिए कि 20 फरवरी से पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जाए और 30 अप्रैल तक मतदान संपन्न करवाया जाए। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि पंचायतें लोकतंत्र की बुनियाद हैं और इनके चुनाव टालना सीधे तौर पर संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करना है।

 

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क्या रहेगा नया शेड्यूल

• 20 फरवरी से चुनावी प्रक्रिया शुरू
• 30 अप्रैल से पहले मतदान अनिवार्य
• सरकार, पंचायतीराज विभाग और निर्वाचन आयोग मिलकर बनाएंगे कार्ययोजना

सरकार ने परिसीमन करवाने की रखी थी मांग

बीते 7 जनवरी को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया था कि प्रदेश में नई पंचायतों, ग्राम समितियों और जिला परिषदों के गठन की प्रक्रिया जारी है। सरकार का कहना था कि परिसीमन, आरक्षण रोस्टर और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण चुनाव करवाने में अभी कम से कम छह महीने का वक्त लगेगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने भी अदालत को बताया था कि फरवरी-मार्च में परीक्षाओं, मई में जनगणना ड्यूटी और जुलाई-अगस्त में मानसून के कारण चुनाव कराना व्यावहारिक रूप से कठिन है।

 

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याचिकाकर्ता का आरोप: जानबूझकर टाले जा रहे हैं चुनाव

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि पंचायत चुनाव जानबूझकर टाले जा रहे हैं। उन्होंने अदालत में कहा कि सरकार के पास परिसीमन पूरा करने के लिए एक साल का समय था, लेकिन आपदा और प्रक्रियाओं का बहाना बनाकर चुनाव को आगे खिसकाया गया। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि मौजूदा परिसीमन भविष्य के लिए लागू हो, लेकिन वर्तमान में पुरानी जनगणना के आधार पर तुरंत चुनाव कराए जाएं।

अदालत की सख्त टिप्पणी

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पंचायतें संविधान से निकली संस्थाएं हैं और इनका कार्यकाल खत्म होने के बाद समयसीमा में चुनाव कराना अनिवार्य है। चुनाव प्रक्रिया को लंबे समय तक टालना न केवल कानून के खिलाफ है बल्कि लोकतांत्रिक ढांचे के लिए भी घातक है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने अब पंचायत चुनावों की स्पष्ट समयसीमा तय कर दी है।

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