#खेल
September 25, 2026
हिमाचल की बेटी ने देश को 16 साल बाद दिलाया मेडल- मां और भाई जश्न में डूबे, घर वापसी का इंतजार
16 साल बाद एशियन सीनियर वूमेन वर्ग में देश का चमका नाम
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चंबा। पहाड़ की पगडंडियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच तक पहुंचना आसान नहीं होता, लेकिन हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा की बेटी सीमा ने अपनी मेहनत और शानदार प्रदर्शन से यह कर दिखाया है। एशियन सीनियर वूमेन वर्ग में सीमा ने ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने पूरे चंबा जिले को गर्व से भर दिया है। उनकी सफलता की खबर सामने आते ही परिवार से लेकर खेल प्रेमियों तक खुशी का माहौल है और बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया है।
सीमा की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि करीब 16 साल के लंबे अंतराल के बाद चंबा को एशियन सीनियर वूमेन वर्ग में यह सफलता मिली है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीमा के प्रदर्शन ने जिले के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
चंबा जैसे पहाड़ी जिले से निकलकर बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाना अपने आप में बड़ी बात है। सीमा की इस कामयाबी से उन तमाम युवा खिलाड़ियों को भी उम्मीद मिली है, जो सीमित संसाधनों के बीच खेलों में अपना भविष्य बनाने का सपना देखते हैं।
जापान में चल रही एशियन सीनियर वूमेन वर्ग में 10,000 मीटर फाइनल के दौरान सीमा टॉप-थ्री में बनी हुई थीं। मुकाबला बेहद अहम मोड़ पर पहुंच चुका था और वह पदक की दौड़ में मजबूती से आगे बढ़ रही थीं। इसी बीच अचानक उनका जूता फट गया, जिससे उनकी दौड़ की लय प्रभावित हुई।
इस अप्रत्याशित परेशानी के कारण उनकी गति पर असर पड़ा और वह आगे बढ़ने के लिए अपनी पूरी रफ्तार का इस्तेमाल नहीं कर सकीं। इसके बावजूद सीमा ने हिम्मत नहीं छोड़ी और तीसरे स्थान पर रहते हुए कांस्य पदक हासिल कर लिया
सीमा की सफलता की खबर मिलते ही उनके परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। माता केसरी देवी और भाई राज कुमार को अब सीमा के घर लौटने का बेसब्री से इंतजार है। परिवार के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी भावुक कर देने वाली है क्योंकि सीमा ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए लंबे समय तक मेहनत और लगातार अभ्यास किया है। खेल के मैदान में घंटों पसीना बहाने के बाद अब उनकी मेहनत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दे रही है।
परिजनों का कहना है कि सीमा के घर लौटते ही परिवार में जश्न का माहौल होगा। रिश्तेदार और आसपास के लोग भी उनकी सफलता की खुशी में शामिल होंगे।
सीमा की उपलब्धि के बाद चंबा के खेल प्रेमियों में भी खासा उत्साह है। जिले के लोगों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और सही मंच देने की है।
सीमा की सफलता ने एक बार फिर साबित किया है कि छोटे शहरों और पहाड़ी क्षेत्रों से निकलने वाले खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। उनकी कामयाबी अब सिर्फ उनके परिवार की खुशी नहीं है, बल्कि पूरे चंबा के लिए गर्व का विषय बन गई है। खासकर युवा खिलाड़ियों के लिए सीमा की कहानी यह संदेश देती है कि लगातार मेहनत और मैदान में डटे रहने का नतीजा एक दिन बड़े मंच पर जरूर दिखाई देता है।