#अव्यवस्था
March 19, 2026
हिमाचल में नहीं मिल रहा सिलेंडर : विधानसभा में विधायकों के लिए लकड़ियों पर बन रहा खाना
सिलेंडर ना मिलने से रसोइये परेशान, करनी पड़ रही दोगुनी मेहनत
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शिमला। खाड़ी देशों के बीच चल रहे तनाव का असर हिमाचल में भी दिखने लगा है। राजधानी शिमला में इन दिनों कमर्शियल LPG गैस सिलेंडरों की कमी का असर अब आम जनजीवन से निकलकर सरकारी व्यवस्था तक पहुंच गया है।
हालात ऐसे बन गए हैं कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान माननीयों और स्टाफ के लिए बनने वाला भोजन भी पारंपरिक तरीके से लकड़ी के चूल्हों पर तैयार किया जा रहा है।
विधानसभा सत्र के दौरान रोजाना विधायकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य स्टाफ सहित सैकड़ों लोगों के लिए भोजन तैयार किया जाता है। सामान्य दिनों में यह काम कमर्शियल गैस सिलेंडरों के सहारे आसानी से हो जाता है। मगर मौजूदा किल्लत ने व्यवस्था को पूरी तरह बदलकर रख दिया है।
अब रसोइयों को बड़े-बड़े बर्तनों में खाना लकड़ी जलाकर पकाना पड़ रहा है। इससे जहां खाना बनाने में अधिक समय लग रहा है, वहीं मेहनत और खर्च दोनों बढ़ गए हैं। लकड़ी की खरीद, उसे जलाने की व्यवस्था और धुएं के बीच काम करना रसोई कर्मचारियों के लिए चुनौती बन गया है।

विधानसभा के लिए भोजन की आपूर्ति मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के होटलों से होती है। खासतौर पर हॉलीडे होम और पीटरहॉफ में इन दिनों रसोई व्यवस्था पूरी तरह बदली हुई नजर आ रही है।

यहां के रसोइयों का कहना है कि गैस की आपूर्ति बाधित होने के बावजूद उन्हें तय समय पर बड़ी मात्रा में भोजन तैयार करना पड़ रहा है। लकड़ी के चूल्हों पर खाना बनाना न केवल धीमा है, बल्कि इसमें निरंतर निगरानी और बहुत मेहनत भी लगती है। चुनौतियों के बावजूद रसोई कर्मचारी लगातार अपने काम में जुटे हुए हैं। सीमित संसाधनों में भी वे समय पर भोजन तैयार कर रहे हैं ताकि सत्र की कार्यवाही प्रभावित न हो।
इन दिनों हिमाचल प्रदेश विधानसभा बजट सत्र का दूसरा चरण जारी है, जो बुधवार से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। ऐसे महत्वपूर्ण समय में गैस की किल्लत ने प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अगर जल्द ही कमर्शियल LPG सिलेंडरों की नियमित आपूर्ति बहाल नहीं होती है, तो पूरे सत्र के दौरान इसी तरह लकड़ी के चूल्हों पर ही भोजन तैयार करना पड़ेगा।

इस स्थिति ने सप्लाई सिस्टम और प्रबंधन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। राजधानी जैसे महत्वपूर्ण शहर में, वह भी विधानसभा सत्र के दौरान, इस तरह की किल्लत सामने आना व्यवस्था की तैयारी पर सवाल उठाता है।