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March 24, 2026
श्रीनगर से हिमाचल आए फौजी भाई : चिंतपूर्णा मां को भेंट किए दो बड़े-बड़े शेर, देख भावुक हुए सभी
चिंतपूर्णी माता को फौजी भाइयों ने दी भव्य भेंट
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ऊना। हिमाचल प्रदेश के मंदिरों और शक्तिपीठों के साथ लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। यहां श्रद्धालु अपनी मुरादें पूरी होने पर मंदिरों में भव्य भेंट अर्पित करते हैं। इसी आस्था और समर्पण की एक अनूठी झलक विश्व विख्यात शक्तिपीठ मां चिंतपूर्णी मंदिर में देखने को मिली।
यहां चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर भारतीय सेना के जवानों ने माता रानी के चरणों में दो विशाल शेर अर्पित किए। नवरात्र के छठे दिन भारतीय सेना की 6 डोगरा रेजीमेंट- जो कि जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में तैनात हैं उन्होंने माता रानी के प्रति अपनी अटूट आस्था व्यक्त की।
मंगलवार को रेजीमेंट के प्रतिनिधियों ने विधिवत रूप से यह भेंट मंदिर न्यास के अधिकारियों को सौंपी। इस अवसर पर मंदिर परिसर में एक विशेष आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला, जहां सेना के इस भावपूर्ण समर्पण की हर ओर सराहना हुई। फौजी भाइयों की ये भेंट देख कर हर कोई भावुक हो गया।

रेजीमेंट की ओर से पहुंचे पूर्व सूबेदार राकेश कुमार ने बताया कि इन दोनों शेरों को विशेष रूप से उच्च गुणवत्ता वाली पीतल धातु से तैयार करवाया गया है। हर एक शेर का वजन करीब 220 से 230 किलोग्राम के बीच है। बारीक नक्काशी, मजबूत संरचना और सुनहरी चमक इन मूर्तियों को बेहद आकर्षक बनाती है।
इन भव्य शेरों को मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर स्थापित किया जाएगा। यही वह स्थान है जहां से हर श्रद्धालु माता के दरबार में प्रवेश करता है। ऐसे में ये शेर सुरक्षा और शक्ति के प्रतीक के रूप में स्थापित होंगे।
इस सेवा कार्य को 6 डोगरा रेजीमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल रविंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में पूरा किया गया। उनकी देखरेख में इन मूर्तियों का निर्माण करवाया गया और फिर सुरक्षित तरीके से मंदिर तक पहुंचाया गया।
गौरतलब है कि यह रेजीमेंट वर्तमान में श्रीनगर के पट्टन हैदरबेग क्षेत्र में तैनात है। सीमाओं पर देश की रक्षा में जुटे जवानों द्वारा मां के दरबार में भेजी गई यह भेंट उनकी गहरी आस्था और विश्वास को दर्शाती है।
पूर्व सूबेदार राकेश कुमार ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब रेजीमेंट ने इस तरह की धार्मिक सेवा की हो। इससे पहले भी रेजीमेंट द्वारा ज्वाला जी मंदिर में दो शेर भेंट किए जा चुके हैं।
इसके अलावा, बाबा बालक नाथ मंदिर के लिए भी विशेष प्रतिमाएं जिनमें मोर और बाबा बालक नाथ की मूर्ति शामिल है तैयार करवाई गई हैं। इन प्रतिमाओं को जल्द ही मंदिर में अर्पित किया जाएगा।
इन शेरों को मंदिर अधिकारी संजीव प्रभाकर के माध्यम से मंदिर न्यास को विधिवत रूप से सौंपा गया। मंदिर प्रशासन ने सेना की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह भेंट न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि इससे मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण में भी बड़ा योगदान मिलेगा।
मंदिर अधिकारियों के अनुसार, इन शेरों की स्थापना के बाद मुख्य द्वार की भव्यता और भी बढ़ जाएगी और श्रद्धालुओं को एक दिव्य अनुभव मिलेगा। लोगों का कहना है कि चैत्र नवरात्र के इस पावन अवसर पर सेना और श्रद्धा का यह अनोखा संगम यह संदेश देता है कि- देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवान अपनी धार्मिक जड़ों और आस्था से भी उतनी ही मजबूती से जुड़े हुए हैं।