#उपलब्धि
December 31, 2025
हिमाचल में दुकानदार का बेटा बना सरकारी अफसर, बिना किसी कोचिंग के पास की कठिन परीक्षा
पहले प्रयास में वे साक्षात्कार तक पहुंचे, लेकिन नहीं हुए सिलेक्ट
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मंडी। कहते हैं कि दीपक वही जलता है, जो आंधियों से लड़ना जानता है, सपनों की राह में ठोकरें आएं तो हौसला और निखरता है। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी अंचल से एक बार फिर मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास की ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल जरूर मिलती है।
मंडी जिले के चच्योट क्षेत्र के दुकानदार का बेटा सरकारी अफसर बन गया है। बाढू गांव में रहने वाले नितेश कुमार ने बिना किसी कोचिंग के कठिन प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास कर असिस्टेंट कमिश्नर (एक्साइज एंड टैक्सेशन ऑफिसर) बनने का गौरव हासिल किया है।
26 वर्षीय नितेश कुमार की यह सफलता अचानक नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे वर्षों की मेहनत, धैर्य और निरंतर प्रयास छिपे हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा परीक्षा में चौथे प्रयास में अंतिम सफलता प्राप्त की।
खास बात यह रही कि हर प्रयास में उन्होंने कुछ न कुछ सीखा-
नितेश कुमार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरकारी स्कूल से हासिल की। आगे की पढ़ाई में उन्होंने NIT हमीरपुर से Mtech. की डिग्री हासिल की, लेकिन प्रशासनिक सेवा की तैयारी के लिए उन्होंने किसी बड़े कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। वे पिछले दो-तीन वर्षों से घर पर रहकर ही खुद ही परीक्षा की तैयारी करते रहे। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने किताबों, सिलेबस और आत्म-अनुशासन को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया।
नितेश एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता खीमा राम गांव में छोटी-सी दुकान चलाते हैं, जबकि माता बंती देवी गृहणी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य रही, लेकिन सपनों को उड़ान देने में कभी कमी नहीं आने दी गई। उनके ताया फतेह सिंह, जो पेशे से शिक्षक हैं, ने समय-समय पर उन्हें मार्गदर्शन दिया और मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा।
नितेश के चयन की खबर जैसे ही बाढू गांव और चच्योट क्षेत्र में पहुंची, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। गांव के लोग इसे केवल एक व्यक्ति या परिवार की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की उपलब्धि मान रहे हैं। नितेश आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं, जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं।
नितेश कुमार का कहना है कि परीक्षा की तैयारी के दौरान उतार-चढ़ाव आना स्वाभाविक है। कई बार मन टूटता है, लेकिन हार मान लेना सबसे बड़ी हार होती है। उनका कहना है कि हर असफलता आपको मजबूत बनाती है। ईमानदारी से मेहनत करें, खुद पर भरोसा रखें और धैर्य बनाए रखें, सफलता जरूर मिलेगी।
गौरतलब है कि वर्ष 2025 में कुल 30 अभ्यर्थियों ने हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की है। इस परीक्षा में सिरमौर जिले के राजगढ़ की मेघा सिंह कंवर ने टॉप कर प्रदेश का नाम रोशन किया है।