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December 31, 2025
हिमाचल के दो भाइयों की एक जैसी किस्मत : एक साथ जन्म, पढ़ाई और नौकरी- अब साथ ही होंगे रिटायर
एक ही कक्षा-एक ही बेंच पर साथ बैठकर दोनों ने की पढ़ाई
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हमीरपुर। कहते हैं जोड़ियां ऊपर वाला बनाता है, लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं जिनकी कहानी किस्मत खुद बड़े सलीके से लिखती है। हमीरपुर जिले के छोटे से गांव ढो से निकले दो भाइयों की जीवन-यात्रा कुछ ऐसी ही रही, जहां जन्म से लेकर सेवानिवृत्ति तक हर पड़ाव पर दोनों का साथ बना रहा।
विकास खंड बमसन (टौणी देवी) में तैनात कनिष्ठ अभियंता जगजीत सिंह और राजेश वर्मा 31 दिसंबर यानी एक साथ सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। यह केवल नौकरी का अंत नहीं, बल्कि 58 वर्षों की उस साझा यात्रा का सम्मान है, जिसमें दोनों ने हर सुख-दुख, संघर्ष और सफलता को साथ जिया।
इन दोनों भाइयों की जिंदगी संयोगों की एक लंबी कड़ी है। दोनों का जन्म एक ही दिन 9 दिसंबर 1967 को हुआ। गांव में यह बात शुरू से ही लोगों के लिए कौतूहल का विषय रही कि चचेरे भाई न सिर्फ एक ही उम्र के हैं, बल्कि हर मोड़ पर एक जैसी राह पर चलते रहे।
बचपन की पढ़ाई प्राइमरी स्कूल कंज्याण से शुरू हुई, जहां दोनों एक ही कक्षा और एक ही बेंच पर बैठकर अक्षर ज्ञान से आगे बढ़े। इसके बाद हाई स्कूल परोल और जमा दो की पढ़ाई भोरंज से पूरी की। स्कूल के दिनों में दोनों की पहचान मेहनती, अनुशासित और एक-दूसरे का सहारा बनने वाले छात्रों के रूप में रही।
शिक्षा के बाद भी दोनों की राहें अलग नहीं हुईं। सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए दोनों महाराष्ट्र गए और वहां भी साथ रहकर पढ़ाई पूरी की। नए राज्य, नई भाषा और अलग माहौल के बावजूद दोनों ने एक-दूसरे का संबल बनकर हर चुनौती का सामना किया।
ढ़ाई पूरी करने के बाद करियर की शुरुआत में दोनों ने प्राइवेट क्षेत्र में नौकरी की, लेकिन लक्ष्य स्पष्ट था-सरकारी सेवा में जाकर अपने क्षेत्र के विकास में योगदान देना। कुछ समय बाद दोनों का चयन पंचायती राज विभाग में कनिष्ठ अभियंता के रूप में हुआ।
यहां भी दोनों ने एक ही विभाग में काम करते हुए गांव-गांव विकास कार्यों को जमीन पर उतारने में अहम भूमिका निभाई। सड़क, भवन, जल आपूर्ति और ग्रामीण विकास से जुड़े अनेक कार्यों में दोनों की मेहनत और ईमानदारी की छाप रही। टौणी देवी क्षेत्र में आज भी कई ऐसे कार्य हैं, जिन्हें लोग इन दोनों भाइयों के नाम से जोड़कर याद करते हैं।
संयोग सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं रहा, पारिवारिक जीवन में भी दोनों की कहानी एक जैसी रही। दोनों की पत्नियां शिक्षा विभाग में अध्यापिका हैं और दोनों परिवारों में एक-एक पुत्र है। परिवार, नौकरी और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच भी दोनों भाइयों का आपसी तालमेल हमेशा मजबूत रहा। गांव और क्षेत्र में लोग इन्हें सिर्फ रिश्ते से नहीं, बल्कि व्यवहार और सोच से भी जुड़ा हुआ मानते हैं।
सेवानिवृत्ति के अवसर पर इन दोनों अभियंताओं को सम्मान और स्नेह से विदाई दी जा रही है। मंगलवार को जिला परिषद कार्यालय हमीरपुर में आयोजित कार्यक्रम में जिला पंचायत अधिकारी बबिता गुलेरिया की उपस्थिति में दोनों को उनके सेवाकाल और योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
इसके अलावा ग्राम पंचायत बारीं में प्रधान रविंद्र ठाकुर और पंचायत टीम ने भी दोनों के लंबे और निष्कलंक सेवाकाल की सराहना की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अब आज विकास खंड कार्यालय में आयोजित होने वाला विदाई समारोह इस अनोखे संयोग का अंतिम आधिकारिक अध्याय होगा, जहां दोनों एक साथ अपनी फाइलें बंद कर सरकारी सेवा को अलविदा कहेंगे।