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April 16, 2026
हिमाचल पंचायत चुनाव: निर्वाचन आयुक्त ने DC और SP को दी ये चेतावनी, इस दिन होगी चुनावी घोषणा!
हिमाचल में 'चुनावी शंखनाद' की तैयारी: 20 के बाद बज सकता है बिगुल
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में गांव की सरकार और नगर निकायों के गठन का काउंटडाउन शुरू हो गया है। राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने वीरवार को प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों (DC) और पुलिस अधीक्षकों (SP) के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मैराथन बैठक की। सवा घंटे तक चली इस उच्च स्तरीय बैठक में आयुक्त ने स्पष्ट कर दिया कि चुनावी तैयारियों में रत्ती भर भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सबसे बड़ी चेतावनी उन अधिकारियों के लिए रही, जो किसी राजनीतिक दल के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर रखते हैं।
निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने सभी अफसरों को दो टूक लहजे में हिदायत दी कि पूरी चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति विशेष का पक्ष लेने की शिकायत मिली, तो आयोग बिना देरी किए उनके खिलाफ कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
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चुनाव को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए सभी जिलों को संवेदनशील और अति संवेदनशील मतदान केंद्रों की समय रहते पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे बूथों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके। बैठक में मतदान के बाद ईवीएम और मतपेटियों को सुरक्षित स्ट्रांग रूम तक पहुंचाने और उनकी निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। आयोग चाहता है कि पूरी प्रक्रिया ट्रैकिंग सिस्टम के तहत हो, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
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प्रदेश में 3757 पंचायतों और 73 नगर निकायों में चुनाव प्रस्तावित हैं। इसके लिए करीब 55 हजार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। आयोग ने अधिकारियों को कहा है कि कर्मचारियों और सुरक्षा बलों की तैनाती पहले से सुनिश्चित कर ली जाए।
आधिकारिक सूत्रों की मानें तो निकाय और पंचायत चुनावों की आधिकारिक घोषणा 20 अप्रैल के बाद किसी भी दिन हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, यह पूरी प्रक्रिया 31 मई से पहले संपन्न करानी अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पंचायती राज और शहरी निकाय चुनाव 31 मई से पहले कराए जाएं। इसी समयसीमा को ध्यान में रखते हुए आयोग तेजी से तैयारियों को पूरा करने में जुटा है।
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पंचायत और नगर परिषद के चुनाव भले ही पार्टी सिंबल पर न हों, लेकिन नगर निगम के चुनाव सिंबल पर होंगे। ऐसे में सत्ताधारी कांग्रेस के लिए यह चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं हैं। भाजपा पहले ही अपने नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपकर चुनावी मोड में आ चुकी है, वहीं कांग्रेस भी संगठन और सरकार के बीच तालमेल बिठाकर अपनी साख बचाने की जुगत में है।