#अपराध
August 26, 2026
हिमाचल : कलयुगी माता-पिता की करतूत, चंद पैसों के लिए बेच दिया बेटा.... 16 साल है उम्र
बच्चे की काउंसलिंग में खुला राज, माता-पिता तक पहुंची पुलिस
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में नाबालिग बच्चों से मजदूरी करवाने से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। जम्मू-कश्मीर के राजौरी क्षेत्र से एक किशोर को हिमाचल प्रदेश लाकर घरेलू काम में लगाए जाने का आरोप है।
मामले में बच्चे के माता-पिता पर पैसों के बदले उसे एक ठेकेदार के हवाले करने के आरोप लगे हैं। बाद में ठेकेदार नाबालिग को हिमाचल लेकर आया, जहां सिरमौर जिले में उसे एक घर में काम पर रखा गया।
शिकायत के बाद चाइल्ड लाइन, बाल कल्याण समिति और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में बच्चे को वहां से सुरक्षित निकाला गया। रेस्क्यू के बाद नाबालिग को शिमला स्थित शेल्टर होम में रखा गया है। यहां बच्चे से बातचीत करने और उसके परिवार तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास किए गए।
शुरुआत में वह अपने घर और परिवार के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहा था। ऐसे में उसकी काउंसलिंग कराने का फैसला लिया गया। काउंसलिंग के दौरान सामने आई जानकारी ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया।
बताया जा रहा है कि करीब 15 से 16 वर्ष की उम्र के इस किशोर के सिरमौर जिले में एक घर पर काम करने की सूचना मिली थी। शिकायत मिलने के बाद संबंधित एजेंसियां सक्रिय हुईं और पुलिस की सहायता से बच्चे को वहां से बाहर निकाला गया।
जिस घर में किशोर काम कर रहा था, वहां के मालिक ने कार्रवाई के दौरान यह दावा किया कि नाबालिग अपनी इच्छा से काम करने के लिए तैयार था और इसी आधार पर उसे रखा गया था। हालांकि, बच्चे की उम्र और उसके हिमाचल पहुंचने की परिस्थितियों को देखते हुए मामले की गहराई से जांच शुरू की गई।
रेस्क्यू के बाद उसे शिमला भेजा गया और सुरक्षित वातावरण में रखा गया। अधिकारियों ने कई बार उससे उसके घर, परिवार और वहां तक पहुंचने की पूरी कहानी जानने की कोशिश की। मगर शुरुआत में वह अपने निवास स्थान की सही जानकारी नहीं दे सका।
बच्चे की स्थिति को देखते हुए उसकी मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग कराई गई। मनोवैज्ञानिक मनोज सहगल से बातचीत के दौरान किशोर ने अपने परिवार और पिछले कुछ महीनों में हुई घटनाओं के बारे में जानकारी दी।
किशोर के अनुसार, उसके पिता ने दूसरी शादी की थी। उसने आरोप लगाया कि बाद में उसके पिता और सौतेली मां ने उसे पैसों के लिए एक ठेकेदार के हवाले कर दिया। इसके बाद वह ठेकेदार उसे जम्मू-कश्मीर से हिमाचल प्रदेश ले आया।
आरोप है कि हिमाचल पहुंचने के बाद बच्चे को सिरमौर जिले में एक व्यक्ति के घर पर काम करने के लिए लगाया गया। किशोर ने काउंसलिंग के दौरान अपनी पढ़ाई और पहले पढ़े गए स्कूल से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा कीं। इन्हीं सुरागों के आधार पर बाल कल्याण समिति ने उसके मूल निवास तक पहुंचने की प्रक्रिया शुरू की।
किशोर से मिली स्कूल संबंधी जानकारी के आधार पर अधिकारियों ने जम्मू-कश्मीर के राजोरी क्षेत्र में उसके परिवार का पता लगाने का प्रयास किया। जांच के बाद जब माता-पिता से संपर्क किया गया तो शुरुआत में उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया और मामले को लेकर टालमटोल करते रहे।
बाद में बातचीत आगे बढ़ने पर उन्होंने किशोर को अपना बेटा स्वीकार कर लिया। हालांकि, बच्चे ने अपने माता-पिता के पास वापस जाने की इच्छा नहीं जताई है। उसने आशंका व्यक्त की है कि अगर उसे दोबारा परिवार के पास भेजा गया तो उसके साथ फिर वैसा ही व्यवहार हो सकता है और उसे किसी अन्य व्यक्ति के हवाले किया जा सकता है।
बच्चे की इच्छा और उसके आरोपों को देखते हुए उसे सीधे परिवार के हवाले करने के बजाय कानूनी और बाल संरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। अब उसे जम्मू-कश्मीर की बाल कल्याण समिति के संरक्षण में भेजने की तैयारी की जा रही है।
योजना यह है कि नाबालिग को सुरक्षित संरक्षण व्यवस्था के तहत रखा जाए और उसके भविष्य को लेकर संबंधित नियमों के अनुसार निर्णय लिया जाए। बालिग होने तक उसके रहने, सुरक्षा और देखभाल की व्यवस्था को लेकर भी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
बाल कल्याण समिति की चेयरपर्सन संतोष शर्मा के अनुसार, सूचना मिलने के बाद चाइल्ड लाइन और CWC की टीम ने पुलिस की सहायता से नाबालिग को सिरमौर से सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद उसे शिमला के शेल्टर होम में रखा गया, जहां उसकी देखभाल की जा रही है।
उन्होंने बताया कि बच्चे को जम्मू-कश्मीर भेजने के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। मामले में बच्चे की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है और उसे ऐसी जगह भेजने की तैयारी है, जहां उसके संरक्षण और भविष्य को लेकर उचित व्यवस्था की जा सके।