#अपराध
August 29, 2025
हिमाचल में आपदा के बीच भी खनन जारी- प्रकृति ने सिखाया सबक, खड्ड में फंसे 10 माफिया
भारी बारिश से नदी का बढ़ गया जलस्तर
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सोलन। हिमाचल प्रदेश इस वक्त प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। ऐसे में कुछ लोग आपदा के बीच अवसर तलाशने का काम कर रहे हैं। मगर प्रकृित के आगे किसी का जोर नहीं चल सकता- इस बात को सोलन में प्रकृित में साबित कर दिया है।
दरअसल, नालागढ़ उपमंडल की महादेव खड्ड में लंबे समय से सक्रिय खनन माफिया पर प्रशासन की कार्रवाई नाकाफी साबित हो रही है। अवैध खनन के खिलाफ सख्ती न होने का नतीजा यह निकला कि प्रकृित ने खुद खनन माफियाओं को सबक सिखा दिया।
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जानकारी के अनुसार, वीरवार देर रात खनन माफिया महादेव खड्ड में खनन कर रहे थे। मगर भारी बारिश के बीच खड्ड में उतरे तीन टिप्पर और तीन जेसीबी मशीनों समेत 10 लोग अचानक तेज बहाव में फंस गए।
जानकारी के अनुसार देर रात अवैध खनन के इरादे से माफिया की टीम महादेव खड्ड में उतरी थी। अचानक बारिश शुरू होने पर खड्ड में पानी का स्तर तेजी से बढ़ गया और पलक झपकते ही टिप्पर व जेसीबी बीच धारा में फंस गए। वाहन चालक अपनी जान बचाने के लिए मशीनों की छत पर चढ़कर चीखने लगे। ग्रामीणों को सुबह करीब साढ़े चार बजे यह घटना पता चली तो उन्होंने तुरंत दभोटा पुलिस चौकी को सूचना दी।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर खनन माफिया के कुछ साथियों की मदद से बचाव अभियान चलाया। JCB मशीनों से अस्थायी रूप से पानी का रुख मोड़ा गया, जिसके बाद वाहनों पर फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका।
हालांकि इस दौरान ग्रामीणों में खासी नाराज़गी देखने को मिली क्योंकि यह खड्ड महादेव पुल से महज 50 मीटर की दूरी पर है और लगातार खनन से पुल की नींव को खतरा पैदा हो गया है।
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पुलिस ने स्थानीय व्यक्ति की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है। वाहन चालकों की पहचान-
इनके खिलाफ माइनिंग एक्ट और वन संपदा की चोरी समेत कई धाराओं में केस दर्ज हुआ है। ASP बद्दी अशोक वर्मा ने बताया कि देर रात 10 लोग टिप्पर और जेसीबी लेकर खड्ड में गए थे, जो पानी के तेज बहाव में फंस गए। पुलिस ने इन्हें बचाने के साथ ही अवैध माइनिंग की कार्रवाई अमल में लाई है।
स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि आखिर किसके संरक्षण में खनन माफिया खुलेआम खड्ड से संसाधनों की लूट कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले भी पुल सुरक्षा कारणों से कई दिन बंद रह चुका है और यदि जल्द कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो पुल दोबारा बंद करना पड़ सकता है। प्रशासन के रवैये पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।