#अपराध
February 22, 2026
हिमाचल: टैक्सी में मिली चरस की बड़ी खेप, सप्लाई करने निकले थे चार युवक; पुलिस ने धरे
नाकाबंदी पर टैक्सी की तलाश में दो किलो से भी अधिक मिली चरस
शेयर करें:

बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ छेड़ी गई मुहिम के बीच एक बार फिर चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिस प्रदेश को देवभूमि और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है, वहीं अब युवा पीढ़ी तेजी से नशे के दलदल में धंसती नजर आ रही है। छोटी उम्र के युवक बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों के साथ पकड़े जा रहे हैं, जो चिंता का विषय बनता जा रहा है।
ताजा मामला बिलासपुर जिला के स्वारघाट क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान एक टैक्सी से भारी मात्रा में चरस बरामद की। पुलिस के अनुसार चार युवक टैक्सी में चरस की बड़ी खेप भरकर सप्लाई के लिए निकले थे] लेकिन रास्ते में ही पुलिस के हत्थे चढ़ गए।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में बच्चा तस्करी गिरोह का भंडाफोड़- 3 अरेस्ट, एक नवजात का रेस्क्यू- पंजाब तक फैला है जाल
थाना स्वारघाट की टीम ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुन्हण के पास विशेष नाका लगाया हुआ था। संदिग्ध वाहनों की सघन जांच के दौरान एक टैक्सी को रोका गया। तलाशी लेने पर वाहन की डिक्की से 2 किलो 317 ग्राम चरस बरामद हुई। पुलिस ने मौके पर ही टैक्सी में सवार चारों युवकों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों में तीन युवक मंडी जिला और एक कुल्लू जिला से संबंधित बताया जा रहा है। सभी की उम्र 26 से 30 वर्ष के बीच है।
यह भी पढ़ें :हिमाचल : घर में तोड़फोड़ का काम बना काल- खेलते बच्चे पर गिरी ईंट, अस्पताल में तोड़ा दम
आरोपियों की पहचान 30 वर्षीय हीम सिंह निवासी बेड, 26 वर्षीय चमन लाल निवासी खलाओ व 26 वर्षीय देवराज निवासी सैंगली, तहसील बालीचौकी जिला मंडी और 26 वर्षीय राहुल निवासी थरास तहसील भुंतर व जिला कुल्लू के रूप में की गई है।
पुलिस अधीक्षक संदीप धवल ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। अब पुलिस यह खंगालने में जुटी है कि नशे की यह खेप कहां से लाई गई थी और इसे किन क्षेत्रों में सप्लाई किया जाना था।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: सुनसान जगह खड़ी कार में 2 युवतियों संग मिला एक युवक, बड़े गिरोह का हुआ पर्दाफाश
पुलिस का कहना है कि नशा माफिया के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और परिवारों की सक्रिय भूमिका भी जरूरी है, ताकि युवा पीढ़ी को इस खतरनाक रास्ते पर जाने से रोका जा सके।