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February 24, 2026

हिमाचल में 200 करोड़ का घोटाला : 5 हजार एजेंटों ने फंसाए भोले-भाले लोग, लूटी जमा-पूंजी

इन्वेस्टमेंट के नाम पर लूटे लोग, फरार हुई कंपनी

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SHIMLA NEWS

शिमला। हिमाचल प्रदेश में निवेश के नाम पर खड़ी की गई एक बड़ी वित्तीय व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है। सुरक्षित भविष्य और ऊंचे रिटर्न का सपना दिखाकर प्रदेशभर के हजारों लोगों से करोड़ों रुपये जुटाए गए, लेकिन समय आने पर रकम लौटाने में कथित तौर पर गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।

निवेश के नाम पर घोटाला

मामले ने तूल पकड़ा तो जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं और अब पूरा नेटवर्क जांच के दायरे में है। CID थाना शिमला में ह्यूमन वेलफेयर क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-आपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के चेयरमैन, उप चेयरमैन और नौ निदेशकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

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200 करोड़ का घपला

आरोप है कि सोसायटी ने प्रदेश में करीब 5,000 एजेंटों का नेटवर्क खड़ा कर लोगों से लगभग 200 करोड़ रुपये एकत्रित किए। जिन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है- वो सभी लोग अलग-अलग जिलों से संबंध रखते हैं और सोसायटी के संचालन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभा रहे थे।

इन लोगों के खिलाफ केस दर्ज

  • स्नेह दीपा गुप्ता
  • चंदर प्रकाश गुप्ता
  • जसवीर
  • नितिन आहूजा
  • संजय वर्मा
  • विकास
  • ईश्वर सिंह
  • जितेंद्र कुमार
  • अरुण प्रशांत सोनी
  • रामस्वरूप
  • कुंदन देव

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प्रदेशभर में फैला एजेंट नेटवर्क

शिकायत के अनुसार, एजेंटों का जाल सोलन, शिमला, मंडी, सिरमौर, कांगड़ा सहित कई जिलों में सक्रिय था। ये एजेंट गांव-गांव और घर-घर जाकर लोगों को FD, RD और अन्य बचत योजनाओं में निवेश के लिए प्रेरित करते थे। स्थानीय बैठकों, छोटे-छोटे कार्यालयों और व्यक्तिगत संपर्क के जरिए विश्वास कायम किया गया।

आकर्षक ब्याज देने का भरोसा

कई निवेशकों ने बताया कि एजेंटों ने योजनाओं को “पूरी तरह सुरक्षित” बताते हुए तय अवधि में आकर्षक ब्याज देने का भरोसा दिलाया। कुछ मामलों में शुरुआती किश्तों का भुगतान समय पर कर विश्वास और मजबूत किया गया, जिससे और लोग जुड़ते चले गए।

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कैसे खुली पोल?

समस्या तब सामने आई जब कई निवेश योजनाओं की परिपक्वता अवधि पूरी हुई। निवेशकों का आरोप है कि भुगतान के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़े, लेकिन राशि नहीं मिली। कहीं तकनीकी कारणों का हवाला दिया गया तो कहीं दस्तावेज अधूरे बताकर मामला टाल दिया गया। कई लोगों का कहना है कि उन्हें न तो मूलधन वापस मिला और न ही ब्याज। कुछ एजेंटों ने भी कथित तौर पर यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उन्हें ऊपर से भुगतान नहीं मिल रहा।

कहां पहुंची CID की जांच?

मामले की गंभीरता को देखते हुए CID ने सोसायटी के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों, लेन-देन और निवेश दस्तावेजों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाया जा रहा है कि एकत्रित किए गए लगभग 200 करोड़ रुपये किन खातों में जमा हुए, कहां स्थानांतरित किए गए और किन परियोजनाओं या निजी खातों में निवेश किए गए।

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साथ ही एजेंट नेटवर्क की संरचना, कमीशन प्रणाली और धन संग्रह की प्रक्रिया की भी पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित है या इसमें आपराधिक साजिश के तत्व भी शामिल हैं।

हजारों परिवारों की चिंता बढ़ी

इस कथित घोटाले का असर प्रदेश के हजारों परिवारों पर पड़ा है। कई लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत, बच्चों की पढ़ाई के लिए जमा रकम या रिटायरमेंट फंड इन योजनाओं में निवेश किया था। अब वे अपनी जमा पूंजी को लेकर चिंतित हैं।

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विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी कानूनी वैधता, पंजीकरण, ऑडिट रिपोर्ट और नियामक संस्थाओं से अनुमति की जांच अवश्य करनी चाहिए। अधिक लाभ का लालच अक्सर जोखिम भी साथ लाता है।

क्या वापस मिलेगा पैसा?

फिलहाल, पूरा मामला जांच के अधीन है और आने वाले दिनों में CID की जांच से कई और तथ्य सामने आ सकते हैं। प्रदेशभर के निवेशकों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि उनकी मेहनत की कमाई वापस मिल पाएगी या नहीं।

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