#हादसा

February 24, 2026

हिमाचल : 3 सेकेंड में ढह गई पहाड़ी, सड़क पर चल रही थी टैक्सी, मची चीख-पुकार

अचानक दरका पहाड़ का बड़ा हिस्सा

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LANDSLIDE KULLU HIMACHAL ROADS BLOCKED VEHICLES DAMAGED

कुल्लू। हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू में आज सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब साफ आसमान और धूप के बीच अचानक पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा दरक गया। यह घटना मणिकर्ण-बरशैणी सड़क पर घाटीगढ़ के पास हुई- जहां भारी मात्रा में चट्टानें और मलबा सड़क पर आ गिरा।

पहाड़ का बड़ा हिस्सा दरका

देखते ही देखते मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें साफ दिखाई देता है कि तीन वाहन ठीक उसी समय सड़क पर पहुंच रहे थे, जब ऊपर से पत्थरों की बरसात शुरू हुई।

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लोगों में फैली दहशत

चालक सतर्कता दिखाते हुए तुरंत रुक गए। अगर वे कुछ सेकंड भी आगे बढ़ जाते तो बड़ा हादसा हो सकता था। गनीमत यह रही कि किसी तरह की जनहानि नहीं हुई, लेकिन लोगों के दिलों में दहशत जरूर बैठ गई।

साफ मौसम में भी क्यों खिसक रहा पहाड़?

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले दिनों हुई बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण पहाड़ी का भीतरी हिस्सा कमजोर हो चुका है। दिन और रात के तापमान में अंतर, जमीन के भीतर जमा नमी और लगातार हो रहा कटाव चट्टानों को अस्थिर बना रहा है। यही कारण है कि मौसम साफ होने के बावजूद छोटे-बड़े पत्थर लगातार गिर रहे हैं।

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कई बार हो चुका है भूस्खलन

ग्रामीणों के अनुसार, यह मार्ग पहले भी कई बार भूस्खलन की चपेट में आ चुका है। हर बार अस्थायी रूप से मलबा हटाकर यातायात बहाल कर दिया जाता है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल अब तक नहीं हो सकी है।

रोज गुजरते हैं सैकड़ों वाहन

मणिकर्ण-बरशैणी सड़क पार्वती घाटी की जीवनरेखा मानी जाती है। इसी रास्ते से स्थानीय लोग, स्कूली बच्चे, मरीज और जरूरी सामान ढोने वाले वाहन प्रतिदिन आवाजाही करते हैं। इसके अलावा पर्यटक और श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में यहां आते हैं। ऐसे में मार्ग का बार-बार बंद होना न केवल आम जनजीवन को प्रभावित करता है, बल्कि पर्यटन कारोबार पर भी असर डालता है।

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कई बार हालात ऐसे बन जाते हैं कि वाहन चालकों को खुद फावड़े उठाकर सड़क से पत्थर हटाने पड़ते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस डर के साये में सफर करना मजबूरी बन गया है।

प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग

क्षेत्रवासियों ने मांग उठाई है कि पहाड़ी की वैज्ञानिक जांच कराकर स्थायी ट्रीटमेंट किया जाए। मजबूत रिटेनिंग वॉल, वायर मैश नेटिंग और ड्रेनेज सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं की जाएं ताकि ढलान को स्थिर किया जा सके। साथ ही वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग की योजना पर भी विचार जरूरी बताया जा रहा है।

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क्या बोले अधिकारी?

लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता गोविंद ठाकुर ने बताया कि मार्ग को बहाल करने के लिए मशीनें तैनात कर दी गई हैं। मणिकर्ण क्षेत्र में एक JCB स्थायी रूप से रखी गई है, ताकि भविष्य में मार्ग अवरुद्ध होते ही तुरंत कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए चरणबद्ध तरीके से मलबा हटाया जा रहा है।

 

हालांकि, स्थानीय लोग चाहते हैं कि केवल अस्थायी इंतजामों से आगे बढ़कर दीर्घकालिक और वैज्ञानिक समाधान लागू किए जाएं, ताकि पार्वती घाटी के इस अहम मार्ग पर सफर फिर से सुरक्षित और निर्बाध बन सके।

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