#अपराध
April 20, 2025
हिमाचल की जेलों में कम पड़ी जगह- ठूंस-ठूंस कर भरे नशा तस्कर, आंकड़े देख डर जाएंगे आप
जेलों में बढ़ता बोझ: क्षमता से अधिक भर गई जेलें
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशा तस्करी एक गंभीर सामाजिक और कानूनी चुनौती बनती जा रही है। राज्य की शांति और सांस्कृतिक विरासत पर अब नशे का साया मंडरा रहा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि प्रदेश की जेलें अब नशा तस्करी से जुड़े मामलों के आरोपियों और दोषियों से ओवरलोड हो चुकी हैं।
राज्य की जेलों में इस समय 1353 कैदी NDPS के तहत बंद हैं। इनमें 1296 पुरुष और 57 महिलाएं शामिल हैं। यह संख्या इस बात का स्पष्ट संकेत है कि नशा तस्करी के मामले किस कदर बढ़ते जा रहे हैं।
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इनमें से 333 कैदी दोषी करार दिए जा चुके हैं, जबकि 1020 आरोपी अभी न्यायिक प्रक्रिया के तहत विचाराधीन हैं। इस भारी संख्या ने प्रदेश की जेल व्यवस्था को गहरे संकट में डाल दिया है।
प्रदेश की 14 जेलों की कुल क्षमता 2580 कैदियों की है, जिसमें 2370 पुरुष और 210 महिला कैदियों के लिए जगह है। लेकिन वर्तमान में इन जेलों में 3136 कैदी बंद हैं, जिनमें से 3015 पुरुष और 121 महिलाएं हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि जेलें अपनी अधिकतम क्षमता से काफी ऊपर पहुंच चुकी हैं, जिससे व्यवस्थागत दबाव भी बढ़ गया है।
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ज्यादातर दबाव कांगड़ा, मंडी, बिलासपुर, चंबा, कुल्लू, कैथू और सोलन जिलों की जेलों में देखा जा रहा है। इन जेलों में न सिर्फ नशा तस्करी के आरोपी बंद हैं, बल्कि अन्य अपराधों के आरोपी भी बड़ी संख्या में हैं। नतीजतन, इन जेलों में जगह की भारी किल्लत हो गई है।
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हालांकि राज्य सरकार और जेल प्रशासन इस चुनौती से निपटने के लिए प्रयासरत हैं। जेलों में कैदियों को रोजगार के अवसर, व्यावसायिक प्रशिक्षण और मानसिक परामर्श जैसी सुविधाएं देने की कोशिशें की जा रही हैं ताकि उन्हें समाज की मुख्यधारा में जोड़ा जा सके। लेकिन जब तक नशा तस्करी पर सख्त और व्यापक नियंत्रण नहीं होता, तब तक इन प्रयासों का असर सीमित ही रहेगा।