#अपराध
February 18, 2025
हिमाचली महिलाओं ने नशा तस्करी में तोड़े रिकॉर्ड, जेल में बढ़ रही संख्या
हिमाचल प्रदेश में NDPS के 1943 मामले दर्ज, 2880 आरोपियों को गिरफ्तार किया
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जारी है और प्रदेशभर में NDPS (नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस) के तहत 1943 मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में 947 चिट्टे (हेरोइन), 690 चरस और 59 अफीम के मामले शामिल हैं।
पुलिस द्वारा जारी हालिया जानकारी में बताया गया है कि प्रदेश में कुल 2880 आरोपियों को नशा तस्करी के केस में गिरफ्तार किया, जिनमें 125 महिलाएं भी शामिल हैं। यदि हम डाटा पर नजर दौड़ाएं तो पाएंगे की हर महीने 11 महिलाएं नशे की खेप के साथ पकड़ी जा रही है। ये आंकड़े अपने आप में ही काफी डरा देने वाले हैँ।
वर्ष 2024 में ही 1714 एनडीपीएस मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें पुलिस ने 371 किलोग्राम से ज्यादा चरस, 36 किलोग्राम अफीम, 11 किलोग्राम हेरोइन, 684 किलोग्राम चूरा पोस्त, 33 किलोग्राम गांजा, 5 ग्राम कोकेन, 35,682 प्रतिबंधित गोलियां, 48 बोतल सिरप और 18,991 प्रतिबंधित कैप्सूल जब्त किए।
जनवरी 2025 तक, 229 नए मामले दर्ज किए गए, जिनमें 36.5 किलोग्राम चरस, 1.6 किलोग्राम अफीम, 1.67 किलोग्राम हेरोइन, 5.2 किलोग्राम पोस्ता भूसा, 2 किलोग्राम गांजा, 20 प्रतिबंधित गोलियां और 592 प्रतिबंधित कैप्सूल जब्त किए गए। इन मामलों में 365 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि प्रदेश में चिट्टे और चूरा पोस्त की खेप बाहरी राज्यों से आ रही है, जबकि चरस की खेप हिमाचल प्रदेश से बाहरी राज्यों में भेजी जा रही है। यह स्थिति प्रदेश में नशे की तस्करी के बढ़ते खतरे को दर्शाती है, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने सख्त कदम उठाए हैं।
DGP स्टेट CID, संजीव रंजन ओझा ने बताया कि पुलिस थानों में एनडीपीएस के मामलों में संलिप्त अपराधियों की निगरानी के लिए एक विशेष रजिस्टर तैयार किया गया है। इसके जरिए उन सभी अपराधियों पर निगरानी रखी जाती है, जो जेल से रिहा होकर बाहर आते हैं।
प्रदेश में बढ़ते नशे के मामलों और तस्करी के बावजूद, पुलिस ने लगातार सख्त कार्रवाई जारी रखी है और नशा तस्करों पर शिकंजा कसा है। अब तक, 2024 और 2025 में की गई गिरफ्तारियों और जब्ती से यह स्पष्ट हो चुका है कि प्रदेश में नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई तेज़ हो गई है, लेकिन समस्या का समाधान पूरी तरह से नहीं हुआ है। वहीं, बढ़ते मामलों ने भी चिंता को बढ़ा दिया है। वहीं नशे की ओवरडोज से हो रही मौतों ने भी सभी को डराया है।