#अपराध
July 4, 2025
हिमाचल: Govt स्कूल का चपरासी करता था छात्राओं से नीच हरकत, तीसरी की बच्ची ने किया खुलासा
पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को किया गिरफ्तार
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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंदिरों में सुरक्षा की दीवारें लगातार कमजोर होती जा रही हैं। अभी हाल ही में सिरमौर जिला में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक पर स्कूल की ही 24 छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे। यह मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि अब कुल्लू जिला से भी ऐसा ही एक मामला सामने आया हैं, जिसने लोगों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। कुल्लू जिला में सरकारी स्कूल के चपरासी पर कई छात्राओं के साथ गलत हरकतें करने के आरोप लगे हैं। इस घटना के प्रकाश में आने के बाद क्षेत्र में अभिभावकों के बीच भारी आक्रोश है।
बताया जा रहा है कि शिकायत करने वाली तीसरी कक्षा की छात्रा है। इस छात्रा ने अपने परिजनों को बताया था कि उसके स्कूल का चपरासी उसे और अन्य कई छात्राओं को गलत तरीके से छूता है। जिस पर परिजनों ने इसकी शिकायत पुलिस थाना में दर्ज करवाई। वहीं अभिभावकों ने घटना की जानकारी स्कूल प्रबंधन समिति को भी दी। घटना की जानकारी मिलते ही समिति के अध्यक्ष ने मामले की शिकायत पुलिस को सौंपी।
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वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी चपरासी के खिलाफ धारा 75 (2) BNS व धारा 8 POCSO Act के तहत महिला थाना कुल्लू में मामला दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है। पुलिस अधीक्षक (एएसपी) संजीव चौहान ने बताया कि महिला थाना की टीम पीड़ित छात्राओं के बयान दर्ज कर रही है और मामले की जांच तेज़ी से आगे बढ़ाई जा रही है।
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घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय अभिभावकों ने स्कूल परिसर के बाहर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन किया और शिक्षा विभाग से मांग की कि आरोपी चपरासी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाए तथा स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं।
इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश में स्कूलों में बच्चियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते कुछ वर्षों में हिमाचल प्रदेश समेत देशभर में शैक्षणिक संस्थानों के भीतर यौन उत्पीड़न की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। कई बार आरोपी शिक्षक, स्टाफ सदस्य या यहां तक कि चपरासी जैसे पदों पर कार्यरत कर्मचारी होते हैं, जो स्कूल में बच्चों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। इस तरह के मामले न केवल मासूम छात्राओं की मानसिक और भावनात्मक सेहत पर गहरा असर डालते हैं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी नुकसान पहुंचाते हैं।
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पॉक्सो एक्ट के तहत नाबालिग बच्चों के साथ यौन शोषण के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान है। यह कानून बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है, लेकिन इसका प्रभाव तभी दिखता है जब ऐसे मामलों की समय पर रिपोर्टिंग हो और जांच निष्पक्षता से की जाए।