#अपराध

June 19, 2025

हिमाचल में नशा तस्कर पिता के बाद अब बेटा भी गिरफ्तार, दोनों पर दर्ज हैं कई मामले

बेटा सप्लाई चेन का करता था संचालन, पिता संभालता था वितरण की जिम्मेदारी

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Chitta Nurpur Police

इंदौरा/कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश में नशे की बढ़ती समस्या से जूझ रही पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है। कांगड़ा जिला में नूरपुर पुलिस ने नशा तस्करी के नेटवर्क को झटका देते हुए एक ऐसे कुख्यात तस्कर को गिरफ्तार किया है, जो न सिर्फ खुद इस धंधे में सक्रिय था, बल्कि उसके पूरे परिवार पर ही नशे का कारोबार फैलाने के गंभीर आरोप हैं। गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान सिकंदर उर्फ निम्मा के रूप में हुई है, जो पहले से फरार चल रहा था और पुलिस को लंबे समय से उसकी तलाश थी। हैरानी की बात यह है कि सिकंदर का पिता आंचल पहले ही नशा तस्करी के कई मामलों में जेल की हवा खा चुका है।

पुलिस अभियान को मिली बड़ी सफलता

नूरपुर के पुलिस अधीक्षक अशोक रत्न ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि यह कार्रवाई नशा तस्करी के खिलाफ जारी पुलिस के विशेष अभियान का हिस्सा है। यह गिरफ्तारी 4 अप्रैल 2025 को दर्ज एक मामले से जुड़ी है। जब इंदौरा के एक्साइज बैरियर चौकी पर एक बाइक सवार के पास से 74.83 ग्राम हेरोइन बरामद की गई थी। मामले की जांच जब आगे बढ़ी तो एक बड़ा नाम सामने आया। यह नाम आंचल पुत्र विद्यासागर निवासी चौकी तहसील इंदौरा का था। पुलिस रिकॉर्ड में पहले से ही कुख्यात आंचल के खिलाफ 2019 और 2021 में भारी मात्रा में हेरोइन की बरामदगी के मामले दर्ज थे।

 

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बाप.बेटे की जोड़ी बनी नशे की जड़

जांच में जो तथ्य उभर कर सामने आए, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। पुलिस ने खुलासा किया कि आंचल ही नहीं, उसका बेटा सिकंदर उर्फ निम्मा भी नशा तस्करी के पूरे नेटवर्क में बराबरी का भागीदार था। सूत्रों के अनुसार बेटा सिकंदर सप्लाई चेन का संचालन करता था, जबकि पिता वितरण की जिम्मेदारी निभाता था। यह पहला मामला नहीं है जहां पूरा परिवार नशा कारोबार में संलिप्त पाया गया हो, जिससे साफ जाहिर होता है कि प्रदेश में नशे का कारोबार अब केवल गिरोहों तक सीमित नहीं, बल्कि पारिवारिक पेशा बनता जा रहा है।

 

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कानूनी दांव.पेंच से बचना रहा आरोपी

एसपी के मुताबिक गिरफ्तारी से बचने के लिए सिकंदर ने कई प्रयास किए। उसने निचली अदालत से लेकर हाईकोर्ट और अंत में सुप्रीम कोर्ट तक अग्रिम जमानत के लिए याचिकाएं दायर कीं, लेकिन जिला पुलिस की ओर से पेश किए गए ठोस सबूतों के चलते सभी अदालतों ने उसे राहत देने से इनकार कर दिया। अंततः सुप्रीम कोर्ट में भी राहत की उम्मीद टूटती देख उसने अपनी याचिका वापस ले ली और पुलिस ने उसे दबोच लिया।

 

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प्रदेश में नशे का बढ़ता जाल प्रशासन के लिए चुनौती

इस पूरे मामले ने एक बार फिर हिमाचल प्रदेश में नशे के गहराते संकट को उजागर कर दिया है। राज्य के सीमावर्ती इलाकों में पंजाब से सटे होने के कारण नशे की आपूर्ति और खपत दोनों ही तेजी से बढ़ रही है। युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में है और अब यह कारोबार माफिया गिरोहों से निकलकर स्थानीय परिवारों तक पहुंच चुका हैए जो राज्य के सामाजिक ढांचे के लिए गंभीर खतरा है।

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क्या कहती है पुलिस

एसपी अशोक रत्न का कहना है कि पुलिस का अभियान नशे के विरुद्ध जारी रहेगा और चाहे आरोपी कितना भी प्रभावशाली या शातिर क्यों न हो, उसे कानून के शिकंजे में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस तरह की गिरफ्तारियां समाज में एक सख्त संदेश देती हैं कि अब हिमाचल की धरती को नशे से मुक्त करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।

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