#अपराध
February 24, 2026
हिमाचल: बुजुर्ग दंपत्ति को आया फोन- दिल्ली ब्लास्ट में आपका नाम, 20 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट रखा..
सेवानिवृत्त अधिकारी और उनकी पत्नी को आया फोन
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हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है। पुलिस द्वारा लगातार जागरूक करने के बावजूद लोग अब भी शातिर ठगों के जाल में फंस रहे हैं। इस बार ठगों ने खुद को एंटी टेररिस्ट सेल का अधिकारी बताकर 78 वर्षीय बुजुर्ग और उनकी पत्नी को 20 घंटे तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखे रखा और उनसे 80 हजार रुपये ठग लिए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला हमीरपुर के रहने वाले 78 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी और उनकी पत्नी के साथ धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। यहां पर 19 फरवरी की दोपहर करीब तीन बजे उनके पास एक अनजान नंबर से फोन आया।
कॉल करने वाले ने खुद को एंटी टेरर सेल का अधिकारी बताया और कहा कि उनके मोबाइल नंबर और बैंक खाते का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों में हुआ है। यहां तक कि दिल्ली बम ब्लास्ट से जुड़े मामले में उनका नाम आने की बात कहकर उन्हें बुरी तरह डरा दिया गया।
शुरुआत में बुजुर्ग को शक हुआ, लेकिन ठगों ने वीडियो कॉल कर फर्जी आईडी कार्ड और कथित सरकारी दस्तावेज दिखाए। जांच और दस्तावेज सत्यापन के नाम पर उनसे 80 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए गए। इसके बाद ठगों ने उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर जोड़े रखा।
अगले दिन ठगों ने बुजुर्ग को कहा कि अपनी 6 लाख रुपये की एफडी तुड़वाकर रकम तैयार रखें। इतना ही नहीं, डर का ऐसा माहौल बनाया कि बुजुर्ग दंपति अगले दिन 6 लाख रुपये की एफडी तुड़वाने बैंक तक पहुंच गए।
शाखा प्रबंधक ने उन्हें अपने केबिन में बुलाकर विस्तार से बात की। बातचीत के दौरान बुजुर्ग काफी घबराए हुए थे। उन्होंने पूरी घटना बताई और बताया कि फोन पर अभी भी वीडियो कॉल चल रही है। शाखा प्रबंधक ने फोन लेकर बात की तो साफ हो गया कि यह साइबर ठगी है।
इसके बाद बैंक प्रबंधन ने तुरंत बुजुर्ग के बच्चों को सूचना दी। उनके बच्चे बाहर रहते हैं, जिन्होंने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई। एहतियात के तौर पर बुजुर्ग का नया बैंक खाता खोलकर उनकी रकम सुरक्षित ट्रांसफर कर दी गई। बैंक मैनेजर की सतर्कता से एक बड़ी ठगी होने से बच गई और दंपति की जीवनभर की जमा पूंजी सुरक्षित रह गई।
SP हमीरपुर ठाकुर ने साफ कहा है कि पुलिस कभी भी किसी को “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती। अगर कोई खुद को सरकारी अधिकारी बताकर पैसे या निजी जानकारी मांगे तो घबराएं नहीं। न तो पैसे ट्रांसफर करें और न ही बैंक डिटेल या OTP साझा करें। तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।