#अपराध
July 1, 2025
CM सुक्खू के मंत्री अनिरुद्ध सिंह के खिलाफ FIR दर्ज, NHAI अधिकारी से की थी बदसलूकी
मंत्री अनिरुद्ध सिंह पर एनएचएआई अधिकारी से बदसूकी पर केस दर्ज
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार में पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ;एनएचएआईद्ध के एक वरिष्ठ अधिकारी पर हमला करने का मामला तुल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में सियासत भी शुरू हो गई है। अब इस मामले में पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
दरअसल बीते रोज 30 जून को राजधानी शिमला के भट्टाकुफर इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने के बाद मौके पर पहुंचे पंचायत राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के इंजीनियर अचल जिंदल पर हमले के आरोप लगे हैं। इंजीनियर अचल जिंदल की शिकायत पर शिमला के ढली थाना में मंत्री और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है, जिससे प्रदेश की राजनीति में जबरदस्त उबाल आ गया है।
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NHAI के प्रोजेक्ट मैनेजर अचल जिंदल का आरोप है कि उन्हें एसडीएम शिमला ग्रामीण के कार्यालय में सोमवार सुबह 11:30 बजे मीटिंग के लिए बुलाया गया था। चूंकि एसडीएम उस समय कार्यालय में मौजूद नहीं थे, तो उन्हें और उनके साथ गए साइट इंजीनियर योगेश को भट्टाकुफर बुलाया गया, जहां मंत्री पहले से मौजूद थे।
अचल जिंदल के अनुसार, उन्होंने मंत्री को बताया कि गिरा हुआ भवन एनएच की राइट ऑफ वे से करीब 30 मीटर दूर था और यह क्षेत्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार कार्रवाई के दायरे में नहीं आता। जैसे ही यह बात उन्होंने कही, तो मंत्री अनिरुद्ध सिंह गुस्से में आ गए और कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने लगे। फिर उन्हें पास के एक कमरे में ले जाया गया, जहां स्थानीय लोगों की मौजूदगी में उनके साथ मारपीट की गई।
इस घटना पर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से बात की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा-
“हिमाचल प्रदेश के पंचायती राज मंत्री और उनके साथियों द्वारा एक NHAI अधिकारी पर किया गया यह जघन्य हमला कानून के शासन का अपमान है। यह न सिर्फ एक लोक सेवक की सुरक्षा को खतरे में डालता है, बल्कि पूरी संस्थागत संरचना को भी कमजोर करता है। दोषियों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”
NHAI ने इस पूरे प्रकरण की शिकायत मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना को पत्र लिखकर की है और इसमें दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की गई है। बताया जा रहा है कि घटना के बाद अधिकारी आईजीएमसी अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है।
इस घटना के बाद प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने तीखा हमला करते हुए कहा-
“यह बेहद शर्मनाक है कि एक मंत्री, पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में सरकारी अधिकारियों से मारपीट करता है। दोनों अधिकारियों को कमरे में बंद कर पीटा गया, उन पर गमले फेंके गए और उन्हें बुरी तरह घायल कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मीडिया के कैमरे बंद करवाए गए और बाद में मीडिया कर्मियों की मदद से ही अधिकारी किसी तरह जान बचाकर भागे। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पुलिस और एसडीएम मौजूद थे, लेकिन किसी ने हस्तक्षेप नहीं किया।” ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुक्खू से मांग की है कि अनिरुद्ध सिंह को तत्काल मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाए और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

अपनी शिकायत में प्रोजेक्ट मैनेजर ने कहा था कि कि उनके सिर पर पानी के घड़े से हमला किया गया, जिससे उन्हें गहरी चोटें आईं और खून बहने लगा। जब साइट इंजीनियर योगेश ने उन्हें बचाने की कोशिश की, तो उसे भी पीटा गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के समय एसडीएम सहित कई अधिकारी मौके पर थे, लेकिन किसी ने हस्तक्षेप नहीं किया।
दोनों अधिकारी किसी तरह वहां से भागकर IGMC अस्पताल पहुंचे, जहां उन्हें भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है। यह मामला न केवल प्रशासनिक स्तर पर बल्कि राजनीतिक हलकों में भी हलचल पैदा कर सकता है, क्योंकि इसमें एक मौजूदा कैबिनेट मंत्री का नाम सामने आया है।
ढली थाना पुलिस ने इस मामले में गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। FIR में BNS की धारा 132, 121(1), 352, 126(2) और 3(5) लगाई गई हैं। वहीं, Central Engineering Services Officers Association ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखा है और उच्च स्तरीय कार्रवाई की मांग की है।
इस पूरे प्रकरण में अभी तक कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ेगा, यह राजनीतिक रूप से और भी संवेदनशील हो सकता है।