#अपराध
August 20, 2025
हिमाचल : डॉक्टर बनने के चक्कर में लड़की ने रचा खेला, पकड़ी गई चालाकी- थाने पहुंचा मामला
सवालों के घेरे में एडमिशन प्रक्रिया
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश का प्रतिष्ठित डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा इन दिनों एक बड़े फर्जीवाड़े का गवाह बना है। यहां पर एक लड़की की चालाकी पकड़ी गई है- जिसने की डॉक्टर बनने के चक्कर में एक खेल रचा था।
मंगलवार को चल रही भर्ती प्रक्रिया के दौरान कॉलेज प्रशासन ने MBBS में दाखिला लेने आई एक छात्रा को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश पाने की कोशिश करते हुए पकड़ लिया। मामले के सामने आते ही कॉलेज प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की और मामला पुलिस के हवाले कर दिया।
यह पूरा मामला हमीरपुर जिले के धनेटा क्षेत्र की राशि नामक छात्रा से जुड़ा है। आरोप है कि छात्रा ने काउंसलिंग के दौरान दस्तावेजों में हेराफेरी कर सीट हासिल करने की कोशिश की। छात्रा ने जिस मेरिट नंबर 108 के आधार पर एडमिशन का दावा किया, वह सीट पहले ही मेडिकल यूनिवर्सिटी की ओर से अश्लेष साहनी नामक विद्यार्थी को आवंटित की जा चुकी थी। यही बात स्क्रूटनी कमेटी को संदिग्ध लगी और पूरी जांच शुरू की गई।
कॉलेज प्रशासन द्वारा गठित स्क्रूटनी कमेटी ने जब छात्रा के सभी प्रमाण पत्रों की बारीकी से जांच की तो कई गड़बड़ियां सामने आईं। इस कमेटी में नोडल ऑफिसर डॉ. राजेश गोयल, डॉ. प्रवीण कुमार, डॉ. सोनिया धीमान, सत्या भूषण, कमल सिंह और गुरुचरण सिंह शामिल थे। विस्तृत जांच के बाद यह साफ हो गया कि छात्रा ने प्रवेश प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. मिलाप शर्मा ने तुरंत इस संबंध में ASP धर्मशाला, DSP कांगड़ा और पुलिस चौकी टांडा को लिखित शिकायत भेजी। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और किसी भी प्रकार की धांधली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
DSP कांगड़ा अंकित शर्मा ने पुष्टि की कि शिकायत देर रात प्राप्त हुई है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच की जा रही है। पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि छात्रा ने यह फर्जी दस्तावेज खुद तैयार किए या इसके पीछे कोई बड़ा रैकेट काम कर रहा है।
इस घटना ने मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कॉलेज प्रशासन मानता है कि यदि स्क्रूटनी कमेटी समय रहते दस्तावेजों की बारीकी से जांच न करती, तो कोई फर्जी छात्रा वैध छात्र की सीट हथिया सकती थी। इससे न केवल मेधावी विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होता, बल्कि चिकित्सा शिक्षा की विश्वसनीयता भी दांव पर लग जाती।
टांडा मेडिकल कॉलेज में फर्जी दस्तावेजों से दाखिले की कोशिश का मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और अभिभावकों में भी चर्चा तेज है। उनका कहना है कि अगर समय रहते इस तरह के प्रयासों को रोका न गया तो मेहनती छात्रों के अधिकार छिन जाएंगे और पूरे शिक्षा तंत्र की छवि धूमिल होगी।