#अपराध
February 4, 2026
हिमाचल : काम के दबाव से परेशान था सरकारी कर्मी, परिजनों को खेत में मिली देह- पास पड़ा था NOTE
पुलिस को मिला दो पन्नों का सुसा.इड नोट- खुले कई राज
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सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले एक बेहद दुखद और चिंताजनक मामला सामने आया है। इस मामले ने सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपमंडल राजगढ़ के हाब्बन क्षेत्र में एक सरकारी कर्मी ने आत्महत्या कर ली है।
कर्मी की मौत के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। जिला सांख्यिकी कार्यालय सोलन में कार्यरत जिला सांख्यिकी अधिकारी 40 वर्षीय प्रेम प्रकाश भगनाल (40) निवासी कोढ़ब बागना ने सोमवार को फांसी लगाकर अपनी जान दे दी।
प्रेम प्रकाश ने अपने गांव के पास जंगल में एक पेड़ से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटनास्थल पर पुलिस टीम को सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है- जिसमें प्रेम प्रकाश ने कई राज खोले हैं। साथ ही अपनी मौत के लिए कुछ लोगों को जिम्मेदार ठहराया है।
स्थानीय लोगों ने जंगल में शव को देखा, जिसके बाद परिजनों और पुलिस को जानकारी दी गई। राजगढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया। मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
पुलिस को घटनास्थल से दो पेज का सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें प्रेम प्रकाश भगनाल ने अपनी आत्महत्या के पीछे की वजहों को विस्तार से लिखा है। नोट में उन्होंने किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराने के बजाय पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
सुसाइड नोट के अनुसार, अधिकारी प्रशासनिक कार्यशैली, विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के व्यवहार, तथा आपसी संवाद की भारी कमी से लंबे समय से मानसिक रूप से परेशान थे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि यह कोई व्यक्तिगत विवाद या पारिवारिक समस्या नहीं थी, बल्कि सिस्टम में मौजूद खामियां और काम का अस्वस्थ वातावरण उन्हें अंदर ही अंदर तोड़ रहा था।
मृतक के पिता केदार सिंह ने बताया कि प्रेम प्रकाश कुछ दिनों से छुट्टी पर घर आए हुए थे। इस दौरान उनका व्यवहार सामान्य नहीं था और वे लगातार मानसिक तनाव में नजर आ रहे थे। पिता के अनुसार, बेटे ने कई बार बताया था कि विभाग के कुछ बड़े अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी उन पर गलत तरीके से काम करने का दबाव बना रहे हैं।
परिजनों का कहना है कि लगातार दबाव, काम को लेकर असमंजस और वरिष्ठ अधिकारियों से संवाद की कमी ने उनकी मानसिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया। इसी तनाव के चलते उन्होंने यह कठोर कदम उठाया।
प्रेम प्रकाश अपने पीछे चार साल के मासूम बेटे, पत्नी और बुजुर्ग माता-पिता को छोड़ गए हैं। परिवार पर इस घटना के बाद दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में मातम का माहौल है और हर कोई इस बात से स्तब्ध है कि एक जिम्मेदार अधिकारी को इस हद तक मानसिक दबाव झेलना पड़ा।
परिजनों ने प्रशासन से इस पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते विभागीय स्तर पर समस्याओं को गंभीरता से लिया गया होता, तो शायद आज यह दिन नहीं देखना पड़ता। परिवार चाहता है कि सच्चाई सामने आए और भविष्य में किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
यह मामला विमल नेगी केस की याद भी दिलाता है, जिसमें एक सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद सिस्टम, विभागीय दबाव और मानसिक उत्पीड़न को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। विमल नेगी मामले में भी परिजनों ने कार्यस्थल के तनाव, अधिकारियों के व्यवहार और संस्थागत खामियों को जिम्मेदार ठहराया था।
दोनों मामलों में एक समानता साफ नजर आती है- सरकारी विभागों में बढ़ता काम का दबाव, संवादहीनता और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संवेदनशीलता की कमी। ये घटनाएं संकेत देती हैं कि अगर सिस्टम के भीतर समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो ऐसे दुखद मामलों की पुनरावृत्ति से इंकार नहीं किया जा सकता।
ASP योगेश रोल्टा ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और सुसाइड नोट सहित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच के दौरान विभागीय रिकॉर्ड, कार्यस्थल से जुड़े तथ्यों और परिजनों के बयानों को भी ध्यान में रखा जाएगा, ताकि आत्महत्या के पीछे की परिस्थितियों की पूरी तस्वीर सामने आ सके।