#अपराध

February 18, 2025

"हिमाचल की चलती फिरती कोडीन" पर ED की रेड- करोड़ों का खेल

कफ सिरप घोटाले में ED की छापेमारी से उजागर हुआ मिलावट का भयावह सच

शेयर करें:

codeine medicine

शिमला। यह सभी जानते हैं कि खांसी से राहत देने वाली दवा कोडीन का पूरे देश में नशे के लिए दुरुपयोग होता है। फिर भी कोडीन कफ सिरप पर पाबंदी नहीं लगाई जा सकी है। अब जबकि पूरा हिमाचल चिट्टे के नशे में 'उड़' रहा है,  प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 13 फरवरी को राज्य समेत देश के 4 राज्यों में मारे गए छापों में बड़े पैमाने पर तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े दस्तावेज बरामद कर दवा में मिलावट के भ्यावाह खेल को उजागर किया है। 

सबसे पहले जानें कि क्या है कोडीन का सिरमौर कनेक्शन 

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर सिरमौर जिले के पांवटा साहिब की कंपनी विदित हेल्थकेयर कोडीन की दवा कॉकरेक्स के ब्रांड नेम से बनाई जाती है। विदित हेल्थकेयर के मैनेजिंग पार्टनर नीरज भाटिया है। नीरज हरियाणा का रहने वाला है। विदित हेल्थकेयर की कॉकरेक्स को फरीदाबाद की एसएस इंडस्ट्रीज और एनके फार्मा, कंसल फार्मा, कंसल इंडस्ट्रीज और अन्य ने अवैध रूप से खरीदा और बाजार में बेच दिया।  ED ने अपने बयान में कहा कि इस पूरे धंधे के पीछे दिल्ली निवासी निकेत कंसल और उसके परिवार के सदस्य शामिल थे। ये सभी दिल्ली के रहने वाले हैं। 

यह भी पढ़ें : हिमाचल : ट्रैकिंग करने गए थे दो दोस्त, एक ने तोड़ा दम- दूसरे की हालत नाजुक

दवा का जम्मू कनेक्शन 

सिरमौर से निकली कॉकरेक्स दवा को बाजार तक लाने और तस्करी के जरिए बांग्लादेश तक पहुंचाने का जिम्मा रईस अहमद भट का था। जम्मू का रहने वाला रईस इस गोरखधंधे से होने वाली काली कमाई को सफेद करने का काम करता था। बांग्लादेश बॉर्डर पर बीएसएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने दवा की एक बड़ी खेप बरामद की थी। उसी के बाद इस तस्करी का राज खुला और एनडीपीएस एक्ट के तहत नारकोटिक्स ब्यूरो सक्रिय हुआ। ED ने चार राज्यों में अपने छापे के दौरान रईस और अन्य आरोपियों के ठिकानों से 2 करोड़ रुपए कैश और ज्वेलरी बरामद की थी। 

कॉकरेक्स दवा कैसे बन गई फेंसिडिल 

आरोप है कि सिरमौर से निकलने के बाद कॉकरेक्स दवा को बाजार में फेंसिडिल के ब्रांड नेम से भी उतारा गया। आपको यहां बताना जरूरी है कि यह सारा काम शेल, यानी जाली कंपनियों के माध्यम से किया गया। जाली कंपनियां इसलिए खड़ी की गईं, क्योंकि दवा को बाजार में उतारने के अधिकृत कंपनियों का लाइसेंस 2019 से 2025 तक था, उसे कैंसिल कर दिया गया था। सूत्रों के अनुसार, कॉकरेक्स को बाजार में फेंसिडिल के रूप में उतारने के लिए उसमें कई खतरनाक केमिकल्स की मिलावट की गई। 

यह भी पढ़ें : हिमाचल में आसान नहीं होगा होम स्टे चलाना, इन शर्तों को करना होगा पूरा

इस तरह होती है कोडीन में मिलावट 

कोडीन सिरप में मुख्य नशीला तत्व कोडीन फॉस्फेट होता है, जो कि एक ओपिओइड (Opioid) है। यह मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम पर असर डालकर दर्द और खांसी को कम करता है। लोग इसे नशे के लिए दुरुपयोग करते हैं, जिससे सिडेटिव (Sedative) और यूफोरिक (Euphoric) प्रभाव मिलता है।

कोडीन में मिलाए जाने वाले केमिकल्स 

  • एल्कोहल (Alcohol): कोडीन सिरप में कभी-कभी एल्कोहल की मात्रा भी होती है, जो इसके नशीले प्रभाव को बढ़ा देती है।
  • एंटीहिस्टामिन (Antihistamines) जैसे डाईफेनहाइड्रामीन (Diphenhydramine): यह नींद लाने वाला प्रभाव डालता है और कोडीन के साथ मिलकर नशे की ताकत बढ़ा देता है।
  • ट्रामाडोल (Tramadol) या मॉर्फीन (Morphine): कभी-कभी कुछ लोग नशे के लिए इसमें अन्य ओपिओइड मिलाते हैं।
  • कोल्ड ड्रिंक्स (Soft Drinks) और कैफीन: नशेड़ी लोग इसे कोल्ड ड्रिंक (जैसे Sprite या Mountain Dew) और कैफीन (जैसे एनर्जी ड्रिंक) के साथ मिलाकर "लीन" (Lean) या "पर्पल ड्रैंक" (Purple Drank) बनाते हैं।

यह भी पढ़ें : हिमाचल : ट्रैकिंग करने गए थे दो दोस्त, एक ने तोड़ा दम- दूसरे की हालत नाजुक

यहां ओवरडोज का मतलब है मौत

दुष्प्रभाव और खतरे: सांस लेने में दिक्कत (Respiratory Depression), बेहोशी और कोमा (Coma), लत लगना (Addiction), लीवर और किडनी डैमेज (Liver & Kidney Damage), मौत (Overdose से मौत का खतरा) कोडीन-आधारित सिरप को मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन के बिना बेचना गैरकानूनी है। सरकार इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है।

पेज पर वापस जाने के लिए यहां क्लिक करें

Related Tags:
ट्रेंडिंग न्यूज़
LAUGH CLUB
संबंधित आलेख