#अपराध
August 17, 2025
हिमाचल पुलिस ने सुबह-सवेरे दो यार किए गिरफ्तार, चिट्टे की पुड़िया लेकर घूम रहे थे दोनों
गश्त पर थी पुलिस टीम- शक के आधार पर दोनों युवकों को तलाशी के रोका
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा राज्य को नशा मुक्त बनाने के लिए मुहिम चलाई जा रही है। इसी मुहिम के तहत पुलिस टीम द्वारा आए दिन तस्करों की धर-दबोचा जा रहा है। ताजा मामला कांगड़ा जिले से रिपोर्ट हुआ है- जहां पुलिस टीम ने दो नशा तस्करों को पकड़ने में सफलता हासिल की है।
नूरपुर पुलिस टीम ने चिट्टे की खेप के साथ दो युवकों को पकड़ने में कामयाबी पाई है। दोनों युवक हिमाचल के चंबा जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस टीम ने दोनों युवकों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, आज सुबह पुलिस टीम कंडवाल के चक्कीू पुल के पास गश्त पर थी। इस दौरान पुलिस टीम को वहां मौजूद दो युवक की गतिविधियों पर शक हुआ। ऐसे में जब पुलिस टीम ने शक के आधार पर युवकों की तलाशी ली तो उनके कब्जे से चिट्टे का पैकेट बरामद हुआ।
पुलिस टीम ने युवकों से 6.36 ग्राम चिट्टा बरामद किया है। दोनों आरोपी युवक एक ही गांव के रहने वाले हैं। दोनों युवक चंबा के टुंडी गांव से संबंध रखते हैं। आरोपियों की पहचान-
मामले की पुष्टि करते हुए SP नूरपुर अशोक रत्न ने बताया कि पुलिस टीम ने दोनों युवकों के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। जल्द ही दोनों को कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया जाएगा। पुलिस टीम दोनों आरोपियों से पूछताछ कर पता लगाने में जुटी हुई है कि वो ये खेप कहां से लाए थे और आगे किसे बेचने की योजना में थे। पुलिस टीम ये भी पता लगाने में जुटी हुई है कि ये युवक चंबा से कांगड़ा किस मकसद से आए थे।
विदित रहे कि, हिमाचल प्रदेश में नशा तस्करी एक गंभीर सामाजिक चुनौती बनती जा रही है। विशेषकर चिट्टा (मिलावटी हेरोइन) की तस्करी ने युवाओं को जकड़ लिया है। पंजाब और हरियाणा से सप्लाई होकर यह जहर हिमाचल के शिमला, कुल्लू, मंडी जैसे जिलों तक पहुंच रहा है।
पुलिस और सरकार लगातार कार्रवाई कर रही हैं- कई गिरफ्तारियां हो रही हैं, करोड़ों की संपत्ति जब्त की जा रही है और कई तस्करों को जेल भेजा गया है। अब तो पुलिस भर्ती में चिट्टा टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है ताकि नशे की लत से ग्रस्त लोग सिस्टम में न घुस सकें।
पंचायत स्तर तक जागरूकता अभियान चल रहे हैं और नशा मुक्ति केंद्रों को मजबूत किया जा रहा है। बावजूद इसके, तस्कर नए-नए रास्ते और तरीके अपनाकर युवाओं को लुभा रहे हैं। यह केवल कानून का नहीं, बल्कि समाज का भी संघर्ष है। लोगों का कहना है कि परिवारों, स्कूलों और युवाओं को मिलकर इस जहर से लड़ना होगा, तभी हिमाचल को नशा मुक्त बनाया जा सकेगा।