#अव्यवस्था
February 18, 2025
हिमाचल:राख हो रहे हैं गांव, साढ़े 11 करोड़ खर्च कर पानी नहीं जुटा सकी सुक्खू सरकार
64 गांवों में नहीं बन सकी हैं आग बुझाने के लिए पानी की टंकियां
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कुल्लू। सर्दियों के मौसम में कुल्लू जिले के गांवों में आग लगने से अभी तक कई गांवों का नामो निशान मिट चुका है, लेकिन आग बुझाने के लिए पानी का इंतजाम आज तक सुक्खू सरकार नहीं कर सकी। कुल्लू में 64 गांव दुर्गम इलाकों में बसे हैं, जहां तक पहुंचने के लिए फायर ब्रिगेड को भी दो घंटे से ज्यादा का वक्त लगता है। इन 64 गांवों में पानी की टंकियां बनाने के लिए सरकार के पास साढ़े 11 करोड़ रुपए का प्रस्ताव दो साल से धूल खा रहा है, जबकि इसी साल जनवरी में बंजार के तांदी गांव में आग से 10 करोड़ की संपत्ति खाक हो चुकी है।
साल 2023 में कुल्लू जिला प्रशासन ने सरकार को 11 करोड़ 43 लाख 18 हजार रुपये का प्रस्ताव भेजा था। इस पैसे से 64 गांवों में एक लाख लीटर क्षमता वाली पानी की टंकियां बनाई जानी हैं। इन 64 गांवों में कुछ ऐसे भी हैं, जहां पीने का पानी ही उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आग लगने पर गांववाले भी बेबस हो जाते हैं।
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जिला कुल्लू के चाचोगी, फोजल, पनगा, बनोगी, बबेली, हलैनी, सारी, मथाला, दुगीलग, बसतोरी, नरोगी, सांगठन, लाहाशनी, जेष्ठा, नजर्जा, भेण, जनाहल, नरोगी, मानसु, छवारा, रशोल, मलाणा, ग्राहण नकथान, आनी में ठारवी, फनौटी, पोखरी, रश्शखंडी, डीम, बुच्छेर, शगान, काथला माझादेश, ओलवा, नगौट, खादवी, बंजार में परवारी, डिंगचा, कनौन, गशीनी, तांदी, धाराशलिंगा, लपाह, शाक्टी, मैल, मझाण, निरमंड में दुराह, खनोटा, कशांदी, जुआगी, धार, गुढी, विजापुर, दराड, बोडलापाच, मनाली में जगतसुख, सोलंग, मझाच, सेथन, शालीन, कन्याल, शेगली, बुरुआ व ओल्ड मनाली गांवों में आग लगने का खतरा अधिक बताया गया है।
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जिला प्रशासन से चिन्हित 64 गांवों में से कुछ में तो पहुंच मार्ग ही नहीं हैं। इन हालात में फायर ब्रिगेड का गांव तक पहुंचना भी मुमकिन नहीं है। इसके बावजूद लोगों की सुरक्षा की बात करने वाली राज्य की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार कुल्लू जिला प्रशासन के प्रस्ताव पर क्यों अमल नहीं कर रही, यह समझ से परे है।