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January 8, 2026

अजब गजब : निधन के बाद भी पेंशन लेते रहे 38,672 बुजुर्ग- सुक्खू सरकार की इस नीति ने खोला राज

आठ लाख से अधिक लोगों को मिलती है सामाजिक सुरक्षा पेंशन

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Social Security Pension

शिमला। हिमाचल प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सुक्खू सरकार की तकनीक आधारित जांच में सामने आया कि 38,672 ऐसे बुजुर्गों के नाम पर पेंशन जारी रही, जिनका निधन हो चुका था। यह मामला सरकारी सिस्टम में गहरी लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। डिजिटल वेरिफिकेशन के बाद यह राज खुला, जिससे सरकारी खजाने को लंबे समय से नुकसान पहुंच रहा था।

CM सुक्खू की इस मुहिम में चौंकाने वाला खुलासा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश पर आईटी विभाग ने डिजिटाइजेशन और वेरिफिकेशन के लिए विशेष सॉफ्टवेयर तैयार किया और पेंशन लाभार्थियों का व्यापक सर्वे कराया। इस प्रक्रिया में कुल 7,12,680 लाभार्थियों का सत्यापन किया गया।

 

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जांच में पाया गया कि 38,672 ऐसे लाभार्थी रिकॉर्ड में दर्ज थे, जो अब जीवित नहीं हैं, फिर भी उनके नाम पर पेंशन जारी हो रही थी। इसके अलावा 5,538 ऐसे लोग भी सामने आए, जो सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए पात्र ही नहीं थे। राज्य के वेलफेयर विभाग की सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं की डिजिटल जांच में सामने आया कि हजारों ऐसे लोगों को पेंशन दी जा रही थी, जिनका पहले ही निधन हो चुका है।

आठ लाख से अधिक लोगों को मिलती है पेंशन

ये सभी तथ्य मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में रखे गए, जिसके बाद उन्होंने वेलफेयर विभाग को निर्देश दिए कि सत्यापित डाटा के आधार पर पेंशन वितरण प्रणाली में तुरंत सुधार किया जाए। सरकार का मानना है कि अगर तकनीक का सहारा न लिया जाता, तो इतनी बड़ी लापरवाही का पता लगाना बेहद मुश्किल होता। राज्य सरकार फिलहाल आठ लाख से अधिक लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन देती है।

 

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इस पूरे डाटा का प्रबंधन नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) के पास है, जिसे आईटी विभाग के सॉफ्टवेयर से क्रॉस-वेरिफाई किया गया। सर्वे में 6,74,173 लाभार्थी जीवित पाए गए, जबकि कुछ मामलों में दस्तावेज तो मौजूद थे, लेकिन लाभार्थी मौके पर नहीं मिले।

टेक्नोलॉजी के जरिए बढ़ाई जाए जवाबदेही

जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी के कारण ऑफलाइन सर्वे करना पड़ा, जहां भी लाभार्थियों की संख्या और पेंशन वितरण में अंतर सामने आया है। अब वेलफेयर विभाग को इस गड़बड़ी की गहन जांच कर जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

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मुख्यमंत्री सुक्खू ने सभी विभागों को साफ संदेश दिया है कि टेक्नोलॉजी के जरिए पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जाए, ताकि भविष्य में जनता के पैसे का सही और ईमानदार उपयोग सुनिश्चित हो सके।

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