#अव्यवस्था
March 5, 2026
हिमाचल : स्मार्ट मीटर ने दिया ग्राहक को झटका, 92 हजार आया बिजली बिल- जांच की मांग
पहले 300-400 आता था बिल, इस बार 92 हजार का फटका
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मंडी। हिमाचल प्रदेश में बिजली के स्मार्ट मीटरों को लेकर चल रहे विरोध के बीच मंडी जिला के चैलचौक क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां सटखन गांव के निवासी और मेडिकल शॉप संचालक 92 हजार 746 रुपये का बिजली बिल मिला है।
बिल की राशि देखकर उनके होश उड़ गए और देखते ही देखते यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया। सुनील कुमार कई वर्षों से चैलचौक बाजार में मेडिकल शॉप चला रहे हैं।
उनका कहना है कि अब तक दुकान का मासिक बिजली बिल औसतन 350 से 400 रुपये के बीच ही आता था। दुकान में कुछ लाइटें, एक-दो पंखे और दवाइयों के लिए फ्रिज चलता है- यानी खपत सामान्य रहती है। लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद स्थिति अचानक बदल गई।

सोमवार रात उनके मोबाइल पर बिजली बिल का टेक्स्ट मैसेज आया। अगली सुबह गूगल पे पर भी भुगतान का नोटिफिकेशन दिखाई दिया। जब उन्होंने बिल की राशि देखी तो 92,746 रुपये का आंकड़ा सामने था।
सुनील का कहना है कि इतनी बड़ी रकम का बिल आना न तो उनकी खपत से मेल खाता है और न ही पिछले रिकॉर्ड से। उन्होंने आशंका जताई है कि या तो मीटर रीडिंग में गंभीर त्रुटि हुई है या फिर तकनीकी गड़बड़ी के कारण यह बिल बना है।

इस घटना के बाद चैलचौक बाजार के अन्य व्यापारियों में भी चिंता बढ़ गई है। छोटे दुकानदारों का कहना है कि यदि इसी तरह भारी-भरकम बिल आने लगे तो कारोबार चलाना मुश्किल हो जाएगा। कई व्यापारियों ने सामूहिक रूप से बिजली विभाग से मांग की है कि-
स्थानीय व्यापार मंडल ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि हिमाचल के कई अन्य हिस्सों से भी स्मार्ट मीटर लगने के बाद अधिक बिल आने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि पहले जहां औसत बिल सीमित दायरे में रहता था, वहीं अब अचानक कई गुना बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसी पृष्ठभूमि में प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्मार्ट मीटरों का विरोध तेज हो गया है। कांगड़ा जिला में लोगों के तीखे विरोध के बाद बिजली बोर्ड ने पहले चरण में अपने कर्मचारियों के घरों में ही स्मार्ट मीटर लगाने का फैसला लिया- ताकि व्यवस्था की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों को शांत किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट मीटर का उद्देश्य पारदर्शिता और रियल-टाइम खपत की निगरानी है, लेकिन यदि तकनीकी खामियां या डेटा सिंक्रोनाइजेशन में त्रुटि हो, तो उपभोक्ताओं का भरोसा डगमगा सकता है। ऐसे मामलों में त्वरित जांच और पारदर्शी प्रक्रिया ही विवाद कम कर सकती है।
फिलहाल, मंडी के सुनील कुमार अपने बिल की पुनः जांच का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि गलती साबित होती है तो विभाग को सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देना चाहिए, ताकि आम उपभोक्ताओं का विश्वास बना रहे।