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July 14, 2025

HRTC ड्राइवर-कंडक्टर संघ का फूटा गुस्सा, डेढ़ साल से नहीं मिली वर्दी, कट रहे मोटे चालान

बरसात में भीगकर भी पहननी पड़ती है पुरानी यूनिफॉर्म

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HRTC Uniform Issue

शिमलाहिमाचल प्रदेश में हिमाचल पथ परिवहन निगम यानी HRTC के ड्राइवर और कंडक्टर बीते डेढ़ साल से बिना नई वर्दी के बसों में सेवाएं दे रहे हैं। नियमों के अनुसार साल में दो बार वर्दी दी जानी चाहिए, लेकिन प्रदेशभर के कर्मचारियों को अब तक न तो गर्मियों की वर्दी मिली है और न ही सर्दियों की। इस कारण कई कर्मचारी एक ही फटी-पुरानी वर्दी में बसें चला रहे हैं।

आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला

जानकारी के अनुसार, HRTC के ड्राइवर और कंडक्टर को पिछले 18 महीनों से न तो कोई वर्दी दी गई है और न ही इसका कोई समाधान सुझाया गया है। डेढ़ साल से वह सब एक ही वर्दी से गुज़ारा कर रहे हैं, जिसमें से अधिकतर की वर्दियां अब फट चुकी हैं।

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वर्दी को लेकर परिचालक यूनियन कई बार प्रबंधन से मिल चुकी है, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिले, अमल नहीं हुआ। खास बात यह है कि बारिश के मौसम में जब वर्दी समय पर सूख नहीं पाती या उपयोग लायक नहीं रह जाती, तब भी कर्मचारियों से ड्यूटी की अपेक्षा की जाती है।

चालान बना और बड़ा मुद्दा

वर्दी न मिलने के बावजूद जब ड्राइवर और कंडक्टर वर्दी के बिना ड्यूटी करते हैं, तो निगम के निरीक्षक 1500 रुपये तक का चालान काट रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि एक तरफ तो वर्दी दी नहीं जा रही, और दूसरी तरफ जुर्माने लगाए जा रहे हैं।

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ऐसे में यह दोहरे मापदंड समझ से परे हैं। एक कर्मचारी ने नाराजगी जताते हुए कहा, हम दिन-रात सेवाएं दे रहे हैं। एक वर्दी को रोज धोकर पहनना मजबूरी है। लेकिन जब वह भीग जाती है या सूखती नहीं है, तो क्या करें? ऊपर से चालान भरना पड़े, यह अन्याय है।

HRTC प्रबंधन की चुप्पी

इस पूरे मामले पर अब तक HRTC प्रबंधन की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यूनियन की मांग है कि जल्द से जल्द वर्दी वितरित की जाए और जब तक वर्दी नहीं दी जाती, तब तक चालान प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।

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कर्मचारी संगठनों ने यह भी संकेत दिए हैं कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो प्रदेशभर में आंदोलन छेड़ा जा सकता है। यह मुद्दा अब सिर्फ वर्दी का नहीं, सम्मान और व्यवहार का भी बन चुका है।

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