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April 23, 2025

गजब! हिमाचल में कानून तोड़कर बनाई गईं 2,183 अवैध सड़कें, अब हाईकोर्ट जाएगा वन विभाग

सीएम सुक्खू ने दिए निर्देश

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शिमला। हिमाचल प्रदेश में वन संरक्षण कानून (FCA) को तोड़कर बिना अनुमति के 2183 सड़कें बन गई हैं। अब राज्य का वन विभाग सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू के निर्देश पर इन अवैध सड़कों को वैध करवाने के लिए हाईकोर्ट में समीक्षा याचिका दायर करने जा रहा है। 

10 मई से पहले हाईकोर्ट में याचिका दायर

ऐसी अवैध सड़कों का सबसे बड़ा जाल वन विभाग के मंडी जोन में है। उसके बाद शिमला का नंबर है। वन विभाग की एक हाईप्रोफाइल मीटिंग में सीएम ने निर्देश दिया कि इन अवैध सड़कों को नियमित करने के लिए हाईकोर्ट में समीक्षा याचिका डाली जाए, ताकि ऐसी सड़कों पर लोग अपनी जमीन का दावा न कर सकें। अब वन विभाग 10 मई से पहले हाईकोर्ट में याचिका दायर करने जा रहा है। 

 

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दावे और आपत्तियों पर बन गई सड़क

असल में वन अधिकार कानून 2006 में बना। हिमाचल में यह 2016 में लागू हुआ। 10 साल के दरमियान ऐसी कई सड़कें बन गईं, जिन पर वन अधिकार कानून के तहत दावे किए जा चुके थे। कानूनन ऐसी सड़कों को नियमित सड़क नहीं कहा जा सकता। ऐसे में जिन जमीनों के ऊपर ये सड़कें बनी हैं, उन पर पट्टाधारकों के दावे और आपत्तियां लगी हैं। इसके कारण सड़कों के सुधार कार्य में अक्सर विवाद की स्थिति बन जाती है। कोर्ट से एक बार नियमितीकरण का आदेश आने के बाद लोग बेधड़क इन सड़कों से होकर गुजर सकेंगे।

 

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कोर्ट में होगा सरकार का लिटमस टेस्ट

वन विभाग के मंडी जोन में ऐसी सबसे अधिक 821 सड़कें, शिमला जोन में 613, हमीरपुर जोन में 254 और कांगड़ा जोन में 495 सड़कें हैं। वन अधिकार अधिनियम ऐसे समुदायों को वनों का अधिकार देता है, जो कम से कम तीन पीढ़ियों से वन भूमि पर रह रहे हैं और उस पर निर्भर हैं। पंचायत और ग्राम सभा स्तर पर ऐसे समुदाय वन भूमि पर दावे कर सकते हैं। दावों का निपटारा वन विभाग करता है। अब हाईकोर्ट में वन विभाग की समीक्षा याचिका में यह देखा जाएगा कि ऐसी कितनी अवैध सड़कों पर वनभूमि के दावे लंबित हैं और सरकार के स्तर पर कितने दावों का निपटारा किया गया है। यह कानूनी प्रक्रिया लंबी चल सकती है और तब तक सड़कों की हालत में सुधार की गुंजाइश कम ही है।

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