#अव्यवस्था
March 3, 2026
होली पर सुक्खू सरकार ने लगाई पानी में आग: दामों में 8% तक उछाल, सीवरेज की दरों में भी वृद्धि
आम आदमी की जेब पर पड़ेगा सीधा असर
शेयर करें:

शिमला। होली के पावन अवसर पर हिमाचल प्रदेश में पानी महंगा हो गया है। हिमाचल की सुक्खू सरकार ने पानी का मूल्य 8 प्रतिशत बढ़ा दिया है। पानी की दरें बढ़ने की सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।
आपको बता दें कि राजधानी शिमला में इस महीने से पानी महंगा हो गया है। शिमला नगर निगम ने पानी के शुल्क में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी लागू कर दी है। इसका सीधा असर शहर के करीब 26,000 घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। पानी के साथ-साथ सीवरेज शुल्क भी समान अनुपात में बढ़ेगा, क्योंकि यह पानी की खपत से जुड़ा हुआ है।
नगर निगम का कहना है कि बढ़ती महंगाई, बिजली दरों, मेंटेनेंस खर्च और कर्मचारियों के वेतन जैसी जिम्मेदारियों को देखते हुए पानी के शुल्क में हर साल 8 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा रही है। अधिकारियों का तर्क है कि यदि समय-समय पर शुल्क संशोधित न किया जाए तो पानी की आपूर्ति व्यवस्था और सीवरेज सिस्टम को सुचारु रखना मुश्किल हो जाएगा।
फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं से कुल पानी के बिल का 30 प्रतिशत हिस्सा सीवरेज शुल्क के रूप में लिया जाता है। चूंकि यह शुल्क पानी की खपत के आधार पर तय होता है, इसलिए पानी के रेट बढ़ने से सीवरेज शुल्क भी स्वतः बढ़ जाएगा। यानी उपभोक्ताओं को दोहरा झटका लगेगा—पानी का बिल भी ज्यादा और सीवरेज शुल्क भी बढ़ा हुआ।
शहर में लगभग 26 हजार घरेलू पानी के कनेक्शन पंजीकृत हैं। नए शुल्क लागू होने के बाद हर परिवार के मासिक बजट पर असर पड़ना तय है। मध्यम वर्गीय और किराए के मकानों में रहने वाले परिवारों को इसका सीधा असर महसूस होगा।
यह बढ़ोतरी मेयर सुरेंद्र चौहान द्वारा पेश किए गए वार्षिक बजट का हिस्सा है। बजट में साफ तौर पर कहा गया था कि उपभोक्ता शुल्क में संशोधन से निगम की आय बढ़ेगी और जल आपूर्ति व सीवरेज व्यवस्था को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाया जा सकेगा।
गौरतलब है कि पहले पानी की आपूर्ति सीधे नगर निगम के अधीन थी, लेकिन बाद में इसे शिमला जल प्रबंधन निगम लिमेटेड को सौंप दिया गया। परिचालन व्यवस्था में निजी भागीदारी भी जोड़ी गई है, जिससे सेवा की गुणवत्ता बेहतर करने का दावा किया गया था।
निगम निकाय का कहना है कि पाइपलाइन मरम्मत, जल स्रोतों के संरक्षण और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है। वहीं दूसरी ओर, कुछ सामाजिक संगठनों और उपभोक्ताओं का कहना है कि बार-बार बढ़ोतरी से आम आदमी पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। पहले ही रसोई गैस, बिजली और रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़े हुए हैं, ऐसे में पानी का महंगा होना लोगों के लिए नई चुनौती बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शुल्क बढ़ाना अनिवार्य है तो इसके साथ सेवा गुणवत्ता, नियमित सप्लाई और पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि बढ़ी हुई दरों से निगम की वित्तीय स्थिति कितनी मजबूत होती है और उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधाएं मिलती हैं या नहीं।