#अव्यवस्था
March 12, 2026
हिमाचल में अफसरों का बड़ा कारनामा! तय से अधिक वसूली सैलरी, सरकारी खर्चे पर किया सैर सपाटा
ऑडिट रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
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शिमला। एक ओर हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार प्रदेश को आर्थिक मंदी के भंवर से निकालने के लिए दिन.रात मशक्कत कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ रसूखदार अधिकारियों ने सरकारी खजाने को अपनी जागीर समझ लिया है। सुक्खू सरकार के कार्यकाल के दौरान सामने आई एक ऑडिट रिपोर्ट राज्य लेखा परीक्षा विभाग ;।नकपज क्मचंतजउमदजद्ध की ताजा रिपोर्ट ने एक ऐसे सनसनीखेज घोटाले का पर्दाफाश किया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हिमाचल में वित्तीय अनियमितताओं का यह मामला व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े करता है।
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कुछ अधिकारियों को निर्धारित वेतन से अधिक भुगतान किया गया, वहीं प्रशिक्षण कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी वे सरकारी खर्चे पर सैर.सपाटा करते रहे। इस मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है और अब सरकार ने अनियमितताओं की जांच और वसूली की प्रक्रिया शुरू करने के संकेत दिए हैं। ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक यह पूरा खेल 1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2025 के बीच खेला गया।
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शिमला के मशोबरा स्थित राजकीय कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान में नियमों को ताक पर रखकर चहेते अधिकारियों पर मेहरबानी बरसाई गई। ऑडिट में वेतन निर्धारणए यात्रा भत्ता (टीए) भुगतान और अन्य वित्तीय मदों में नियमों की अनदेखी का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ मामलों में अधिकारियों के वेतन में लगभग 3150 रुपये तक की अतिरिक्त वृद्धि कर दी गई, जबकि इसके लिए कोई वैध प्रावधान नहीं था। जिससे सरकार को लाखों रुपये की चपत लगी है।
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भ्रष्टाचार का सबसे शर्मनाक पहलू तब सामने आया जब अधिकारियों की ट्रेनिंग से जुड़ी फाइलें खुलीं। रिपोर्ट के अनुसार कुछ अधिकारी ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद गए थे। नियमानुसार ट्रेनिंग खत्म होते ही मुख्यालय रिपोर्ट करना अनिवार्य था, लेकिन इन साहबों ने इसे सैर.सपाटे का अवसर बना लिया। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद भी बिना किसी अनुमति के ये अधिकारी अनधिकृत तरीके से टूर पर रहे और मजे की बात यह है कि इस पर्सनल वेकेशन का पूरा बिल, टीए-डीए और अन्य भत्ते भी बेशर्मी से सरकारी खाते से वसूल लिए गए।
ऑडिट रिपोर्ट में यात्रा भत्ता और अन्य भत्तों के भुगतान में भी अनियमितताओं की बात सामने आई है। कुछ मामलों में अधिकारियों ने ऐसे दौरों के लिए भी टीए.डीए का दावा कर दिया जो आधिकारिक रूप से स्वीकृत नहीं थे। इसके अलावा चिकित्सा भत्तों के भुगतान में भी हजारों रुपये की अतिरिक्त राशि जारी किए जाने का मामला सामने आया है। इन गड़बड़ियों को वित्तीय अनुशासन की गंभीर चूक माना जा रहा है।
इस बड़े खुलासे के बाद प्रदेश की राजनीति भी गर्मा गई है। कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई इन गंभीर अनियमितताओं की तह तक जाया जाएगा। सरकार अब उन फाइलों को खंगाल रही है जिनके आधार पर यह गलत भुगतान मंजूर किया गया था। सूत्रों की मानें तो दोषी अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की तैयारी है और उनसे अवैध रूप से ली गई राशि की रिकवरी ब्याज समेत की जाएगी।
अब इस पूरे मामले पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं कि सरकार इस पर कितना कड़ा रुख अपनाती है। ऑडिट रिपोर्ट के सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन को लेकर बहस तेज हो गई है। यदि जांच में दोष साबित होता है तो यह मामला हिमाचल के प्रशासनिक ढांचे में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक अहम परीक्षा साबित हो सकता है।