#अव्यवस्था
December 27, 2025
हिमाचल: कुंभकर्णी नींद से जागा प्रशासन, अब इस बहुमंजिला होटल पर चलेगा बुलडोजर; जानें क्यों
9 साल तक बिना अनुमति चलता रहा होटल, सोया रहा प्रशासन
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कुल्लू। आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हिमाचल प्रदेश में जहां सरकार हर मोर्चे पर खर्च घटाने और राजस्व बढ़ाने की कवायद में जुटी है, वहीं प्रशासनिक लापरवाही और नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने के मामले सरकारी खजाने को लगातार चोट पहुंचा रहे हैं। पर्यटन नगरी मनाली से सामने आया एक चौंकाने वाला मामला यह बताने के लिए काफी है कि कैसे वर्षों तक चली अनदेखी और एक होटल संचालक की मनमानी ने प्रदेश के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया।
हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ नौ साल तक चलता रहा और अब जाकर प्रशासन की नींद टूटी है। अब प्रशासन ने ना सिर्फ होटल संचालक को पांच लाख का जुर्माना लगाया है, बल्कि होटल पर बुलडोजर चलाने की तैयारी भी शुरू कर दी है, लेकिन सवाल वही है कि आखिर कैसे 9 साल तक बिना किसी अनुमति के एक बहुमंजिला होटल का संचालन होता रहा।
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दरअसल हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी मनाली में प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण सामने आया है। खखनाल क्षेत्र में स्थित एक बहुमंजिला होटल बिना पर्यटन विभाग और नगर एवं ग्राम नियोजन (टीसीपी) विभाग की आवश्यक मंजूरी के पिछले करीब नौ वर्षों से धड़ल्ले से संचालित होता रहा। इस दौरान न केवल नियमों की अनदेखी हुई, बल्कि प्रदेश सरकार के राजस्व को भी भारी चूना लगाया गया।
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जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 से संचालित द एलेना होटल के पास न तो पर्यटन विभाग की स्वीकृति थी और न ही टीसीपी विभाग से भवन निर्माण की वैध अनुमति। इसके बावजूद होटल वर्षों तक मेहमानों की आवभगत करता रहा और संबंधित विभाग आंखें मूंदे बैठे रहे।
यह मामला तब उजागर हुआ जब स्थानीय निवासी अश्विनी कुमार ने टीसीपी विभाग में इसकी लिखित शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत के बाद हरकत में आए विभाग ने जांच की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पुष्टि हुई कि होटल नियमों के खिलाफ संचालित हो रहा है। होटल संचालक द्वारा की गई अपील भी खारिज कर दी गई, जिसके बाद मुख्य सचिव और टीसीपी निदेशक ने सख्त रुख अपनाते हुए होटल को डिस्मैंटल यानी ध्वस्त करने के आदेश जारी कर दिए।
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इस पूरे प्रकरण ने सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मनाली जैसे संवेदनशील और पर्यटन महत्व वाले क्षेत्र में टीसीपी और पर्यटन विभाग के अधिकारी तैनात होने के बावजूद वर्षों तक किसी ने जांच करने की जरूरत नहीं समझी। इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि बिजली विभाग और जल शक्ति विभाग ने बिना आवश्यक एनओसी के होटल को बिजली और पानी के कनेक्शन जारी कर दिए, जबकि आम नागरिकों को एक कनेक्शन के लिए महीनों तक दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
मामला सामने आने के बाद पर्यटन विभाग ने 13 मई 2025 को बिजली और जल शक्ति विभाग को होटल के कनेक्शन काटने के निर्देश दिए। बिजली विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बिजली आपूर्ति बंद कर दी, लेकिन जल शक्ति विभाग ने पानी का कनेक्शन काटने में देरी की। इस बीच होटल संचालक ने जनरेटर के सहारे करीब एक सप्ताह से अधिक समय तक होटल का संचालन जारी रखा, जिससे प्रशासनिक सख्ती पर भी सवाल उठने लगे।
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टीसीपी मनाली के अधिकारी नवीन ने बताया कि इस मामले में उच्च स्तर पर निर्णय लिया जा चुका है। होटल संचालक पर नियमों के उल्लंघन के चलते करीब पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है और होटल को डिस्मैंटल करने के आदेश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि उच्चाधिकारियों से अंतिम दिशा.निर्देश मिलते ही कार्रवाई को अमल में लाया जाएगा।
आर्थिक संकट से जूझ रहे प्रदेश में यह मामला इस बात का उदाहरण बन गया है कि प्रशासनिक अनदेखी और निजी स्वार्थ किस तरह सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा सकते हैं। नौ वर्षों तक अवैध रूप से संचालित होटल न सिर्फ नियमों का मज़ाक उड़ाता रहा, बल्कि व्यवस्था की कमजोर कड़ियों को भी उजागर कर गया।