शिमला। हिमाचल प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी से हर कोई वाकिफ है। भारी.भरकम फीस, नए सत्र में अलग.अलग मदों के नाम पर अतिरिक्त चार्ज और स्कूल परिसर में ही महंगे दामों पर किताबें, कापियां व वर्दी बेचने की शिकायतें आम रही हैं। लेकिन अब शिक्षा विभाग ने इस व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाते हुए निजी स्कूलों की मनमानी पर नकेल कसने की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि यह बात भी सत्य है कि शिक्षा विभाग हर साल निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्त रूख अपनाने की बात करता है, बावजूद इसके निजी स्कूलों की लूटपाट जारी रहती है। 

अपनी मर्जी से तय नहीं कर पाएंगे फीस

निजी स्कूल प्रबंधन अब अपनी मर्जी से फीस तय नहीं कर पाएंगे। इसक लिए उन्हें अभिभावकों से चर्चा करनी होगी। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नए शैक्षणिक सत्र के शुरू होने से पहले फीस सरंचना तय करने के लिए शिक्षक अभिभावक संघ की एक बैठक बुलाई जाए, जिसमें आगामी सत्र की ट्यूशन फीस, वार्षिक शुल्क और अन्य किसी भी प्रकार के चार्ज पर खुली चर्चा करना अनिवार्य होगा। विभाग का कहना है कि फीस निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि अभिभावकों पर मनमाना आर्थिक बोझ न डाला जाए।

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नोटिस बोर्ड - वेबसाइट पर अपलोड करें जानकारी

शिक्षा विभाग के अनुसार बैठक में जो भी फीस और अन्य शुल्क तय किए जाएंगे, उनका पूरा विवरण स्कूल के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करना होगा। इसके अलावा, स्कूल की आधिकारिक वेबसाइट पर भी फीस संरचना स्पष्ट रूप से अपलोड करनी होगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे अभिभावकों को पहले से पूरी जानकारी मिलेगी और किसी भी प्रकार की अस्पष्टता या भ्रम की स्थिति नहीं रहेगी।

किताबें वर्दी के नाम पर भी नहीं होगी लूट

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी कर कहा है कि अब निजी स्कूल अपने स्तर पर किताबें कापियां और वर्दी नहीं बेचेंगे। यहां तक कि वह किसी विशेष दुकान से सामान खरीदने के लिए भी छात्रों के अभिभावकों को बाध्य नहीं करेंगे। इतना ही नहीं, स्कूल परिसर में किताबें, कापियां, जूते और वर्दी बेचने पर भी रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। छात्रों को स्कूल के लोगो वाली अनिवार्य किताबें या कॉपियां खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा।

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अवैध फंड वसूली पर भी सख्ती

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि भवन निधि, विकास निधि या अवसंरचना निधि के नाम पर अतिरिक्त राशि नहीं ली जाएगी। विभाग ने हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान विनियमन अधिनियम, 1997, नियम 2003 और शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 का हवाला देते हुए कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) तक रद्द किया जा सकता है।

निदेशक का सख्त संदेश

स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली की ओर से सभी जिलों के उपनिदेशकों को पत्र जारी कर इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। पत्र में साफ शब्दों में उल्लेख है कि यदि किसी स्कूल द्वारा आदेशों की अवहेलना की जाती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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शिकायत पर तुरंत कार्रवाई

उपनिदेशकों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी निजी स्कूल के खिलाफ अभिभावकों से शिकायत मिलती है, तो मामले की तुरंत जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। सरकार का संदेश स्पष्ट है शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार की लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

रुकने का कार्यक्रम था, किंतु 12 फरवरी को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक को देखते हुए वह शिमला लौट आए।

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