शिमला/कुल्लू। हिमाचल प्रदेश के अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के आगाज से पहले ही देव निमंत्रण को लेकर कानूनी विवाद चर्चा में आ गया है। 21 अक्टूबर से शुरू होने वाले दशहरे से पहले हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने देवता बंशीरा महाराज सिद्धवां की याचिका खारिज कर दी है। देवता की ओर से उत्सव में अन्य आमंत्रित देवी-देवताओं की तरह निमंत्रण और बैठने की जगह, तंबू, तिरपाल व चटाई जैसी सुविधाएं देने की मांग की गई थी।
अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर प्रशासन के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति संदीप शर्मा की अदालत ने 15 अक्टूबर 2026 को दिए फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता देवता के ऐतिहासिक महत्व और व्यापक जनमान्यता के पर्याप्त प्रमाण रिकॉर्ड पर नहीं हैं। अदालत ने कुल्लू के उपायुक्त की ओर से 10 जनवरी 2025 को पारित आदेश को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: नशा बेच खड़ा किया करोड़ों का साम्राज्य, पुलिस ने कर लिया सब जब्त; डेढ़ करोड़ से अधिक है कीमत
ऐतिहासिक पहचान के प्रमाणों पर टिका फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने देवता से जुड़े ऐतिहासिक रिकॉर्ड और दशहरा उत्सव में भागीदारी के तथ्यों पर गौर किया। रिकॉर्ड के मुताबिक, मूल देवता बंशीरा का रथ वर्ष 2007 से कुल्लू दशहरा में भाग ले रहा है, जबकि याचिकाकर्ता से संबंधित दूसरा रथ वर्ष 1990 में मूल देवता से अलग होने के बाद बनाया गया था। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि संबंधित क्षेत्र के वाजिब-उल-अर्ज राजस्व रिकॉर्ड में याचिकाकर्ता देवता का नाम दर्ज नहीं है। इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने देवता को अन्य आमंत्रित देवी-देवताओं के समान दर्जा और सुविधाएं देने की मांग स्वीकार नहीं की।
यह भी पढ़ें : PM मोदी से मिलीं हिमाचल की उड़नपरी सीमा, हाथ मिलाया- बात कर हुईं भावुक
कारदार संघ की सिफारिश भी अहम
प्रशासन की ओर से अदालत में दलील दी गई कि दशहरा उत्सव में उन्हीं देवी-देवताओं को आमंत्रित किया जाता है, जिनका ऐतिहासिक महत्व और संबंधित क्षेत्र में व्यापक मान्यता है। प्रशासन के अनुसार, याचिकाकर्ता देवता वर्ष 2023 से पहले उत्सव में शामिल नहीं हुआ था। जिला देवता कारदार संघ के 10 अक्टूबर 2011 के प्रस्ताव में भी स्थान, व्यवस्थाओं और वित्तीय संसाधनों की सीमाओं का हवाला देते हुए व्यक्तिगत देवताओं को निमंत्रण नहीं देने की बात कही गई थी। अदालत ने माना कि नए देवी-देवताओं को शामिल करने की सिफारिश करने में कारदार संघ की भूमिका महत्वपूर्ण है। वर्ष 2018 में कुछ नए देवताओं को विशेष व्यवस्था के तहत एक बार अनुमति दी गई थी, लेकिन इसे स्थायी आधार नहीं माना जा सकता।
यह भी पढ़े- अफसरों की लेटलतीफी पर भड़के CM सुक्खू, बोले- काम नहीं करना तो छोड़ो नौकरी, कर दूंगा सस्पेंड
पहले भी हाईकोर्ट पहुंचा था मामला
देवता की ओर से इससे पहले भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। 9 अगस्त 2024 को अदालत ने संबंधित प्राधिकरण को जांच रिपोर्ट के आधार पर छह सप्ताह के भीतर प्रतिनिधित्व पर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 16 अगस्त 2024 को याचिकाकर्ता ने उपायुक्त कुल्लू के समक्ष अपना पक्ष रखा। प्रशासन के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद अब हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया है।
यह भी पढ़ें- मां बालासुंदरी के दरबार में गुप्त दान : भक्त ने चढ़ाया 20 तोले सोने का छत्र
347 देवी-देवताओं और 20 देशों के कलाकारों को न्योता
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव 21 से 27 अक्टूबर तक आयोजित होना है। इस वर्ष उत्सव के लिए 347 देवी-देवताओं और 20 देशों के कलाकारों को आमंत्रित किया गया है। कई देवी-देवता लंबी पैदल यात्रा कर ढालपुर मैदान पहुंचते हैं। ऐसे में उत्सव से ठीक पहले आया हाईकोर्ट का फैसला देव निमंत्रण और व्यवस्थाओं को लेकर चल रही चर्चा के बीच अहम माना जा रहा है।
कारदारों की प्रामाणिकता और नजराने पर भी विवाद
दशहरे से पहले देव संस्कृति चैरिटेबल संस्था के अध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा ने करीब 136 कारदारों और उनसे संबंधित देवी-देवताओं की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दशहरा आयोजन समिति के फैसलों की समीक्षा की मांग भी की है। उनका कहना है कि समिति की कार्यकारिणी का कार्यकाल 30 नवंबर 2024 को समाप्त हो गया था।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : नवरात्रि में दान के नाम पर फर्जीवाड़, यूट्यूबर ने अपना QR कोड लगाकर श्रद्धालुओं से वसूले पैसे
वहीं, जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संघ में सभी 13 खंडों के कारदार शामिल हैं और गैर-माफीदार देवी-देवताओं को भी संविधान के तहत सदस्यता का अधिकार है। उनके अनुसार, 25 सितंबर 2026 को हुए जनरल हाउस में जिला और खंड कार्यकारिणियों को 31 मार्च 2027 तक सेवा विस्तार दिया गया है। चुनाव 30 अप्रैल 2027 तक करवाए जाएंगे।
यह भी पढ़ें : हिमाचल के किसानों को बड़ा झटका...अब महंगा मिलेगा गेहूं का बीज, जानें कितना
देवी-देवताओं के साथ पारंपरिक वाद्य यंत्र बजाने वाले बजंतरियों के नजराने का भुगतान भी मुद्दा बना हुआ है। देव संस्कृति चैरिटेबल संस्था और बजंतरी संघ चाहते हैं कि उत्सव में भाग लेने वाले बजंतरियों को पहले दिन ही उनके बैंक खातों में भुगतान किया जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सात दिन तक इंतजार न करना पड़े।
