शिमला। हिमाचल प्रदेश में राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के बाद सियासी तापमान बढ़ गया है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू बुधवार दोपहर दिल्ली दौरे से शिमला लौटे और लौटते ही प्रदेश के बिगड़ते वित्तीय हालात पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की घोषणा कर दी। माना जा रहा है कि केंद्र की ओर से आरडीजी ग्रांट रोके जाने के फैसले ने राज्य की वित्तीय रणनीति और राजनीतिक समीकरण दोनों को प्रभावित किया है।

दिल्ली में हाईकमान से मंथन

दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार बैठक में प्रदेश सरकार के कामकाज, संगठनात्मक गतिविधियों और मौजूदा वित्तीय चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने हाईकमान को बताया कि आरडीजी बंद होने से राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है और विकास कार्यों की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।

यह भी पढ़ें : सुक्खू सरकार का खजाना खाली : केंद्र ने भी पैसा किया बंद, अब मंत्रियों-विधायकों की जेब से होगी भरपाई

आरडीजी बंद होने से बढ़ी चिंता

राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के बाद राज्य के सामने वेतन, पेंशन और विकास योजनाओं के वित्तपोषण को लेकर नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि केंद्र के इस फैसले से प्रदेश को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा। इसी मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने के लिए उन्होंने दिल्ली से लौटते ही सर्वदलीय बैठक बुला ली है, ताकि सभी दल मिलकर हिमाचल के हित में रणनीति तय कर सकें।

जयराम ठाकुर पर सीधा हमला

मुख्यमंत्री सुक्खू ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर पर निशाना साधते हुए कहा कि यह समय राजनीतिक बयानबाजी का नहीं, बल्कि हिमाचल के हित में एकजुट होकर आवाज उठाने का है। उन्होंने आरोप लगाया कि जयराम ठाकुर ने बैठक में न बुलाए जाने की बात कहकर भ्रम फैलाया। सुक्खू ने कहा कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में लगभग 54 हजार करोड़ रुपये की आरडीजी आई, जबकि मौजूदा सरकार के समय 17 हजार करोड़ रुपये मिले। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने बड़े वित्तीय संसाधन मिलने के बावजूद कर्मचारियों को अपेक्षित वित्तीय लाभ क्यों नहीं दिए गए।

यह भी पढ़ें : हिमाचल : एक्शन मोड में वन विभाग, ज्वैलरी की दुकानों में पड़ी RAID- 6 दुकानदारों से मिले तेंदुए के...

रोजगार और ओपीएस पर सरकार का रुख स्पष्ट

विपक्ष द्वारा संभावित पद कटौती के आरोपों के बीच मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी प्रकार की नौकरियां समाप्त नहीं करेगी। उन्होंने दावा किया कि पूर्व सरकार की तुलना में अधिक रोजगार अवसर सृजित किए जाएंगे। साथ ही पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को लेकर भी उन्होंने दोहराया कि इसे बंद करने का कोई विचार नहीं है।

विधानसभा सत्र और राजनीतिक रणनीति

सीएम सुक्खू ने बताया कि 16 फरवरी से विधानसभा सत्र बुलाया गया है। शुरुआती तीन बैठकों का कार्यक्रम तय हो चुका है, जबकि शेष सत्र की अवधि पर निर्णय लिया जाना है। माना जा रहा है कि आगामी सत्र में आरडीजी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठेगा और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

यह भी पढ़ें : हिमाचल में डॉक्टर के साथ हुआ बहुत गलत : तीन दिन अपने ही घर में बंधी बना रहा बेचारा- जानें पूरा मामला

नड्डा से मुलाकात टली

दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से मिलने का समय मांगा था। सूत्रों के अनुसार, आरडीजी के मुद्दे पर सहयोग की अपील के लिए यह मुलाकात प्रस्तावित थी, लेकिन समयाभाव के कारण बैठक नहीं हो सकी। मुख्यमंत्री का बुधवार को दिल्ली में रुकने का कार्यक्रम था, किंतु 12 फरवरी को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक को देखते हुए वह शिमला लौट आए।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें