शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून आपदा के बाद केंद्र से मिलने वाली राहत राशि को लेकर एक बार फिर सियासी और संवैधानिक टकराव गहराता नजर आ रहा है। बीते वर्ष बरसात से तबाह हुए हिमाचल के लिए PM नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित विशेष आपदा राहत पैकेज पर अब तक अमल न होने को लेकर राज्य सरकार ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
हिमाचल को नहीं मिली राहत
इस मुद्दे ने अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि संघीय व्यवस्था और राज्यों के अधिकारों से जुड़ी बहस का रूप ले लिया है। दरअसल, बीते साल 9 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद आपदा से प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने धर्मशाला पहुंचे थे।
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1500 करोड़ राहत पैकेज की घोषणा
इस दौरान उन्होंने हिमाचल प्रदेश के लिए 1500 करोड़ रुपये के विशेष आपदा राहत पैकेज की घोषणा की थी। उस समय यह घोषणा आपदा से जूझ रहे लोगों के लिए बड़ी उम्मीद के तौर पर देखी गई थी।
4 महीने के बाद भी नहीं मिला पैसा
जबकि, अब लगभग चार महीने बीत जाने के बावजूद यह राशि राज्य को जारी नहीं की गई है। इसी देरी को लेकर अब प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार पर सौतेले व्यवहार का आरोप लगाया है।
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जगत सिंह नेगी का तीखा हमला
प्रदेश के राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने इस मामले में केंद्र सरकार पर खुलकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि विशेष पैकेज की बात तो दूर, हिमाचल को आपदा राहत के नाम पर “एक पैसा भी नहीं मिला।” नेगी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश के साथ लगातार भेदभाव कर रही है।
एक पैसा भी नहीं मिला
उन्होंने कहा कि यह पहला मौका नहीं है जब राज्य को आपदा राहत के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा हो। मंत्री नेगी ने 2023 की भयावह आपदा का जिक्र करते हुए कहा कि उस वर्ष हिमाचल ने सदी की सबसे बड़ी प्राकृतिक त्रासदी झेली थी, जिसमें 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ था।
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केंद्रीय रिपोर्ट में भी भारी नुकसान की पुष्टि
जगत नेगी ने बताया कि 2023 की आपदा के बाद केंद्र सरकार की टीमें स्वयं हिमाचल आई थीं और उन्होंने जमीनी स्तर पर नुकसान का आकलन किया था। केंद्रीय टीमों की रिपोर्ट में भी करीब 9300 करोड़ रुपये के नुकसान की पुष्टि हुई थी। इसके बावजूद, पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (PDNA) के तहत केवल 2500 करोड़ रुपये की सहायता को ही मंजूरी दी गई, जो वास्तविक नुकसान के मुकाबले बेहद कम थी।
2023 की राहत भी अब तक पूरी नहीं
मंत्री नेगी का आरोप है कि जो राशि मंजूर की गई, वह भी पूरी तरह जारी नहीं की गई। उनके अनुसार वर्ष 2024 में केवल 600 करोड़ रुपये दिए गए और हाल ही में फिर से 600 करोड़ रुपये देने की बात कही गई है।
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आपदा राहत के इंतजार में हिमाचल
नेगी ने कहा कि वर्ष 2026 में प्रवेश करने के बावजूद हिमाचल अभी भी 2023 की आपदा राहत का इंतजार कर रहा है, जो राज्य के पुनर्निर्माण और पुनर्वास कार्यों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है।
संघीय ढांचे पर उठे सवाल
जगत सिंह नेगी ने इस मुद्दे को संघीय व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि जब उत्तराखंड और बिहार जैसे राज्यों को आपदा राहत की राशि समय पर मिल जाती है, तो हिमाचल के साथ अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति संघीय ढांचे की मूल भावना के खिलाफ है, जिसमें सभी राज्यों को समान अधिकार और समान व्यवहार मिलना चाहिए।
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प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद देरी क्यों?
मंत्री नेगी ने यह भी सवाल उठाया कि जब विशेष राहत पैकेज की घोषणा स्वयं प्रधानमंत्री स्तर से हुई थी, तो फिर उसे लागू करने में इतनी देरी क्यों हो रही है। उन्होंने कहा कि आपदा राहत में देरी से पुनर्निर्माण, पुनर्वास और बुनियादी ढांचे की बहाली सीधे तौर पर प्रभावित होती है और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है।
भाजपा का पलटवार
वहीं, इस पूरे मामले पर भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश सरकार के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र राणा ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से जारी की जा रही आपदा राहत राशि का प्रदेश सरकार दुरुपयोग कर रही है। राणा का आरोप है कि जिस उद्देश्य के लिए केंद्र से फंड जारी किया जाता है, उस पर खर्च नहीं किया जा रहा और इसकी जानकारी केंद्र सरकार को है।
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फंड के गलत इस्तेमाल का आरोप
राजेंद्र राणा ने कहा कि हाल ही में केंद्र सरकार ने 600 करोड़ रुपये जारी किए हैं, लेकिन प्रदेश सरकार आभार जताने के बजाय केंद्र पर आरोप लगाने में जुटी है। उन्होंने आरोप लगाया कि आपदा राहत और सड़कों की मरम्मत के लिए मिलने वाले केंद्रीय फंड का इस्तेमाल कर्मचारियों की सैलरी देने में किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी अधिकारी की इसमें संलिप्तता पाई गई, तो उसे गंभीर कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
