शिमला। केंद्रीय बजट में मोदी सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश समेत अन्य पहाड़ी राज्यों की रेवेन्यू डिफेसिट ग्रांट (RDG) बंद किए जाने से प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा है। इस फैसले से हिमाचल प्रदेश को लगभग 40 हजार करोड़ रुपये के संभावित नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। अब इस आर्थिक संकट से निपटने के लिए CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला में बड़ा और अहम ऐलान किया है।

मोदी सरकार ने बंद की ग्रांट

CM सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से उत्पन्न स्थिति की भरपाई के लिए प्रदेश सरकार हिमाचल की भूमि पर स्थापित सभी जल विद्युत परियोजनाओं पर भूमि कर (लैंड टैक्स) लगाने का फैसला लिया है। राज्य सरकार ने इस व्यवस्था को 2 फरवरी से लागू कर दिया है, जिसकी अधिसूचना भी जारी हो चुकी है।

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1800 करोड़ आएगी आमदानी

सरकार के इस फैसले के तहत हिमाचल प्रदेश में संचालित कुल 191 हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स को लैंड रेवेन्यू के दायरे में लाया गया है। इससे राज्य को सालाना करीब 1800 करोड़ रुपये की आमदनी होने का अनुमान है। बिजली कंपनियों को यह राशि वर्ष में दो किश्तों में चुकानी होगी।

लैंड TAX वसूलेंगे CM सुक्खू

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पहले ही कई मंचों से यह स्पष्ट कर चुके हैं कि हिमाचल प्रदेश की नदियों पर बनी जलविद्युत परियोजनाओं से भू-राजस्व प्राप्त करना राज्य का संवैधानिक और नैतिक अधिकार है। उनका कहना रहा है कि प्राकृतिक संसाधनों पर राज्य का पहला हक होता है और लंबे समय से इस दिशा में न्यायसंगत व्यवस्था नहीं थी।

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80 साल की ग्रांट की बंद

दिलचस्प बात यह है कि जिस समय केंद्र सरकार ने वित्त आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए हिमाचल सहित अन्य राज्यों की RDG समाप्त करने का फैसला लिया, लगभग उसी समय प्रदेश सरकार ने लैंड रेवेन्यू लागू करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया। इसी कारण इस फैसले को RDG बंद होने से जोड़कर देखा जा रहा है।

RDG बंद होने से करोड़ों का नुकसान

राज्य सरकार का दावा है कि RDG बंद होने से हिमाचल प्रदेश को आने वाले वर्षों में करीब 35 से 40 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। सरकार और सत्ताधारी कांग्रेस इस फैसले का लगातार विरोध कर रही है। इस मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र भी बुलाया गया है, जिसमें केंद्र सरकार के निर्णय और उसके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

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बंदोबस्त विभाग ने जारी की अधिसूचना

लैंड रेवेन्यू को लेकर बंदोबस्त विभाग ने तय प्रक्रिया के तहत अधिसूचनाएं जारी की हैं। बंदोबस्त कलेक्टर शिमला आईएएस कुमुद सिंह और बंदोबस्त अधिकारी कांगड़ा आईएएस संदीप कुमार ने अपने-अपने डिवीजनों में आने वाली जलविद्युत परियोजनाओं के लिए विस्तृत अधिसूचना जारी की है। इसके आधार पर अब परियोजना संचालकों को रिकवरी ऑर्डर भी भेज दिए गए हैं।

परियोजनाओं के बाजार मूल्य के अनुसार तय की गई दरें

सरकार ने जलविद्युत परियोजनाओं के औसत बाजार मूल्य के आधार पर अलग-अलग दरें निर्धारित की हैं।

  • 14.84 करोड़ रुपये तक के बाजार मूल्य वाली परियोजनाओं पर 1 प्रतिशत
  • 14.84 करोड़ से 37.10 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं पर 1.5 प्रतिशत
  • 37.10 करोड़ से 185.50 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं पर 1.75 प्रतिशत
  • 185.50 करोड़ रुपये से अधिक बाजार मूल्य वाली परियोजनाओं पर 2 प्रतिशत वार्षिक लैंड रेवेन्यू लागू किया गया है
  • इन सभी परियोजनाओं से मिलने वाले कुल रेवेन्यू का अनुमान सालाना 1800 करोड़ रुपये के करीब लगाया गया है।

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दो किश्तों में करना होगा भुगतान

बिजली कंपनियों को यह लैंड रेवेन्यू हर साल दो किश्तों में जमा करवाना होगा। पहली किश्त 1 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच और दूसरी किश्त 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक जमा करनी होगी। यह व्यवस्था फिलहाल 10 वर्षों के लिए लागू की गई है, जिसके बाद नए सिरे से मूल्यांकन किया जाएगा।

चंबा में सबसे अधिक परियोजनाएं

प्रदेश में संचालित 191 जलविद्युत परियोजनाओं में सबसे अधिक 45 परियोजनाएं चंबा जिले में हैं। इसके अलावा कुल्लू में 35, कांगड़ा में 38, मंडी में 10 और लाहौल-स्पीति में दो परियोजनाएं हैं। ऊना और हमीरपुर जिलों में कोई जलविद्युत परियोजना नहीं है, जबकि सिरमौर और अन्य जिलों की परियोजनाओं को मिलाकर कुल संख्या 191 तक पहुंचती है।

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परियोजना संचालकों से पहले हो चुकी हैं बैठकें

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और राजस्व मंत्री जगत नेगी ने लैंड रेवेन्यू को लेकर पहले ही परियोजना संचालकों के साथ कई दौर की बैठकें की थीं। वर्ष 2025 में शुरू हुई यह कवायद अब 2026 में जाकर लागू हो सकी है।

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