नई दिल्ली / हमीरपुर। सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को बड़ी कानूनी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड BCCI से जुड़े सभी प्रशासनिक कार्यों में भाग लेने पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट से सांसद अनुराग को राहत
यह प्रतिबंध करीब 9 वर्षों से लागू था, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेश में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया कि वर्ष 2017 में लगाया गया प्रतिबंध किसी भी तरह से आजीवन अयोग्यता नहीं था।
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9 साल पुराना बैन हटाया
अदालत ने कहा कि उस समय प्रतिबंध का उद्देश्य सुधारात्मक था- न कि किसी व्यक्ति को हमेशा के लिए क्रिकेट प्रशासन से बाहर कर देना। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉय माल्य बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि समय के साथ परिस्थितियों में बदलाव आया है और ऐसे में पुराने आदेश की समीक्षा आवश्यक हो गई थी।
अनुराग मांग चुके हैं माफी
अदालत ने यह भी माना कि अनुराग ठाकुर पहले ही इस मामले में बिना शर्त माफी मांग चुके हैं, जिसे न्यायालय द्वारा स्वीकार किया जा चुका है। पीठ ने साफ शब्दों में कहा कि प्रतिबंध का मकसद व्यवस्था में सुधार लाना था, न कि किसी व्यक्ति को स्थायी रूप से अयोग्य घोषित करना। इसलिए मौजूदा हालात में उस आदेश को जारी रखना उचित नहीं है।
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अब BCCI की बैठकों में ले सकेंगे हिस्सा
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अनुराग ठाकुर को BCCI की आंतरिक, प्रशासनिक और अन्य बैठकों में भाग लेने की अनुमति मिल गई है। इसका मतलब यह है कि अब क्रिकेट प्रशासन में उनकी वापसी का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। हालांकि, यह आदेश सीधे तौर पर किसी पद की नियुक्ति नहीं करता, लेकिन प्रतिबंध हटने से भविष्य में उनकी भूमिका को लेकर संभावनाएं जरूर खुल गई हैं।
क्यों लगा था बैन?
गौरतलब है कि अनुराग ठाकुर वर्ष 2016 में BCCI के अध्यक्ष बने थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित जस्टिस आर.एम. लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू न करने के आरोपों के चलते उन्हें पद से हटाया गया था।
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9 साल BCCI से दूरी
कोर्ट ने यह माना था कि सिफारिशों को लागू करने में देरी और टालमटोल की गई। साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें BCCI अध्यक्ष पद से हटाने के साथ-साथ बोर्ड की गतिविधियों से दूर रहने का निर्देश दिया था।
अनुराग को ठहराया गया जिम्मेदार
IPL में स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने BCCI में सुधार के लिए लोढ़ा समिति का गठन किया था। समिति ने कई बड़े सुधार सुझाए थे। सुप्रीम कोर्ट का मानना था कि इन सुधारों को पूरी गंभीरता से लागू नहीं किया गया- जिस कारण तत्कालीन अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को जिम्मेदार ठहराया गया।
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क्या थीं अहम सिफारिशें?
- एक व्यक्ति एक समय में दो पद नहीं संभालेगा
- आयु सीमा तय की जाएगी
- सरकारी पद पर रहने वाला व्यक्ति BCCI का पदाधिकारी नहीं बन सकेगा
- पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया जाएगा
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क्रिकेट प्रशासन में वापसी की संभावना
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अनुराग ठाकुर की क्रिकेट प्रशासन में वापसी की संभावनाएं एक बार फिर मजबूत हो गई हैं। यह फैसला न सिर्फ अनुराग ठाकुर के लिए, बल्कि BCCI से जुड़े प्रशासनिक ढांचे के लिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होता है कि अदालत का उद्देश्य दंड नहीं, बल्कि सुधार है।
